यूजीसी के नए नियमों पर होगी शिक्षक भर्ती, रद्द होंगे हजारों आवेदन
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हिमाचल विश्वविद्यालय और कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती अब यूजीसी के नए नियमों में होगी। यूजीसी की ओर से सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इस संदर्भ में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब हर तरह के शिक्षकों के पदों पर भर्ती नए रेगुलेशन-2018 में होगी। इससे पूर्व में शिक्षकों के पदों को लेकर किए गए हजारों आवेदन रद्द हो जाएंगे। इन आवेदकों को भी नए सिरे से आवेदन करने होंगे। शुल्क वापसी का फैसला विवि जल्द लेगा।
विवि के कुलसचिव घनश्याम चंद ने शिक्षक भर्ती से संबंधित इस मामले को लेकर नोटिस जारी कर साफ कर दिया है कि यूजीसी के आदेशों के अनुरूप विवि में पूर्व में विज्ञापित पदों को नए नियमों में भरा जाएगा। पूर्व में विज्ञापित पदों के लिए आए आवेदन अब मान्य नहीं होंगे।
एचपीयू ने भरने हैं 114 पद
इससे पूर्व विवि ने आठ सितंबर 2014, 21 जनवरी 2017 और 18 अप्रैल 2017 को शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी और पद विज्ञापित कर आवेदन आमंत्रित किए थे।
एचपीयू प्रशासन ने करीब 114 पद शिक्षकों के भरने हैं। कुलसचिव ने कहा कि यूजीसी ने उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता और पात्रता के रगुलेशन तैयार कर जारी कर दिए हैं ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों का एक स्तर बना रहा है।
इनमें यूनिवर्सिटी और कॉलेज शिक्षक तथा अन्य शिक्षण कार्य करने वाले स्टाफ को शामिल किया है। यूजीसी ने विवि और कॉलेजों को इस संदर्भ में अलग से आदेश जारी किए हैं।
विवि में 114 से अधिक पदों पर नहीं हो पाई भर्ती
हिमाचल विवि में 2014 और 2017 में विज्ञापित किए शिक्षकों के पदों के लिए हजारों में आवेदन आए थे। इनमें कुछ विभागों में भर्ती हुई लेकिन करीब 114 विज्ञापित पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी। इसके चलते पद रिक्त रह गए।
इन पदों के लिए भी हजारों में आवेदन आए थे। इसलिए इन आवेदनकर्ताओं में ऐसे भी होंगे जो यूजीसी के नए रेगुलेशन के अनुरूप पात्रता शर्तें पूरी नहीं करते होंगे। इसलिए इन सभी आवेदनकर्ताओं को दोबारा पद विज्ञापित होने पर नए सिरे से आवेदन करने होंगे।
शुल्क वापसी पर जल्द होगा फैसला
विवि के जन संपर्क अधिकारी डॉ. रणवीर वर्मा ने बताया कि नए नियमों में अगर पूर्व में किए आवेदन रद्द हो जाते हैं। तो ऐसे आवेदकों से लिया शुल्क वापस किया जाएगा या नहीं इसका फैसला विवि की वित्त समिति की बैठक में लिया जाएगा।