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जनजातीय क्षेत्रों में जल्द भरे जाएंगे खाली पद, भत्ता भी बढ़ाया
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 13 Feb 2017 12:14 AM IST
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जनजातीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभिन्न विभागों के सभी पदों और सेवाओं के लिए दुर्गम क्षेत्र उप काडर बनाया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करने के लिए कर्मचारियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से सरकार ने विभिन्न प्रोत्साहन दिए हैं।
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वर्तमान सरकार ने शीतकालीन और जनजातीय भत्ते को बढ़ाकर 300 रुपये प्रति माह किया है। जिन कर्मचारियों ने जनजातीय क्षेत्रों में सेवा अवधि के तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं, उन्हें वर्षवार अतिरिक्त भत्ता प्रदान किया जा रहा है। यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक आरएस नेगी ने दी है।
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उन्होंने कहा कि राज्य योजना से जनजातीय उपयोजना के लिए धनराशि में व्यापक वृद्धि की गई है। वर्तमान में राज्य योजना का कुल नौ प्रतिशत इस पर खर्च किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2012-13 में जनजातीय उप योजना का आकार 333 करोड़ रुपये था, जिसे वर्तमान वित्त वर्ष में बढ़ाकर 468 करोड़ रुपये किया गया है।
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सीमा क्षेत्र विकास योजना के तहत इस वर्ष 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में परिवहन क्षेत्र में 43.70 करोड़ रुपये, सड़कों और पुलों पर 49.09 करोड़ रुपये एवं भवन निर्माण पर 59.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2016-17 के लिए 62.09 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जनजातीय और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निकासी वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 को तीव्र गति से कार्यान्वित करने के लिए राज्यस्तरीय निगरानी समिति तथा जिला और उपमंडल स्तर की समितियों का गठन किया गया है। ग्राम स्तर पर 16,707 वन अधिकार समितियों का भी गठन किया जा चुका है।
यूएनडीपी और हिपा शिमला के सहयोग से लगभग 200 अधिकारियों को शिमला, मंडी, धर्मशाला और जिलास्तरीय समिति में नवनिर्वाचित गैरसरकारी सदस्यों को शिमला में वन अधिकार अधिनियम 2006 के बारे में विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रदेश में अभी तक 1890.11 हेक्टेयर भूमि पर सामुदायिक वन अधिकार चिन्हित किए गए हैं। जिला किन्नौर के पूह में मिनी सचिवालय और चांगो में हैलीपैड का निर्माण करवाया गया है।