फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rape convict acquitted by Himachal High Court, know the whole matter

Shimla News: दुष्कर्म की सजा भुगतने वाला हिमाचल हाईकोर्ट से बरी, जानें पूरा मामला

Tue, 19 Sep 2023 07:00 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 19 Sep 2023 07:00 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में 10 साल की सजा भुगतने वाले व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। 

विज्ञापन
Rape convict acquitted by Himachal High Court, know the whole matter
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में 10 साल की सजा भुगतने वाले व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने उसे तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने तिब्बतियन टी सेवांग की अपील को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। विचारण अदालत ने टी सेवांग को पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया था। इस जुर्म के लिए विचारण अदालत ने उसे 10 साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इस निर्णय के खिलाफ उसने हाईकोर्ट के समक्ष अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि निचली अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है।

विज्ञापन


अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने 23 फरवरी, 2014 को 11 साल के बच्चे के साथ दुष्कर्म किया है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी की उम्र 37 वर्ष और पीड़ित की उम्र 11 वर्ष थी। पीड़ित की चिकित्सा जांच घटना के दिन ही हुई थी और चिकित्सा जांच में दुष्कर्म के बारे में कोई राय नहीं थी। अदालत ने कहा कि इतने कम समय में दुष्कर्म के घाव नहीं भर सकते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता है जब तक उसके खिलाफ पुख्ता सुबूत न हो। अदालत ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करते हुए आरोपी की अपील को स्वीकार किया है।
विज्ञापन


दवा परीक्षण प्रयोगशाला में नियमित कर्मचारी क्यों नहीं : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने प्रदेश में घटिया दवाइयों के उत्पादन पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि दवा परीक्षण प्रयोगशाला में नियमित कर्मचारी की तैनाती क्यों नहीं की गई है जिसे जिम्मेवार ठहराया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की है। अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि क्या दवा उत्पादकों ने निजी दवा प्रयोगशाला से परीक्षण करवाया है या नहीं। यदि परीक्षण के दौरान दवाइयां घटिया पाई गईं तो क्या राज्य सरकार को सूचित किया या नहीं। अदालत ने निजी दवा प्रयोगशालाओं के खिलाफ की कार्रवाई के बारे में भी शपथपत्र मांगा है।


पीपल फोर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था ने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 में उद्योग विभाग की ओर से 3.50 करोड़ रुपये प्रयोगशाला के निर्माण के लिए खर्च किए हैं। इसके बावजूद अभी तक इसे चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 12वीं पंच वर्षीय योजना के तहत 30 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। अदालत ने राज्य सरकार से प्रयोगशाला के निर्माण के बारे में भी ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर पर अदालत ने जनहित में याचिका दर्ज की है। खबर में उजागर किया गया है कि राष्ट्रीय औषधि नियामक और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने हिमाचल में निर्मित 11 दवाइयों के नमूनों को घटिया घोषित किया है, जबकि एक नमूने को नकली पाया गया। नकली पाई जाने वालों में पशु चिकित्सा दवा भी शामिल है। घटिया और नकली दवाइयों के निर्माता बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, कालाअंब के साथ-साथ पांवटा साहिब के औद्योगिक समूहों में स्थित हैं।


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed