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खाली झोला लेकर आए बाबा 5 साल में बन गए करोड़पति, सच्चाई चौंका देगी

Wed, 24 May 2017 11:52 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन Updated Wed, 24 May 2017 11:52 AM IST
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Ramlok Temple Dispute, Read Baba Amardev Full Story.

‌हिमाचल के सोलन में निर्माणाधीन मंदिर में खड़ी आलीशान गाड़ियां खुद बयां कर रही हैं कि आखिर यहां जिसका भी डेरा है, वह बाबा कितना प्रभावशाली रहा होगा। मुश्किल से रामलोक मंदिर के निर्माण को चार साल हुए हैं।

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इस भव्य निर्माण में करीब 25 करोड़ की मूर्तियां सजाई जा चुकी हैं। एक-एक पत्थर को चुन-चुनकर लगाया है। नक्काशी और बिजली पर लाखों खर्चे जा रहे हैं। आखिर, इतना तामझाम एक अकेला साधु कैसे कर गया।
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सवाल यह है कि खाली झोला लेकर हिमाचल आए बाबा के पास इतना धन और गाड़ियां कहां से आईं। कंडाघाट के साधुपुल का रामलोक मंदिर और यहां रह रहे बाबा अमरदेव खासा चर्चा में हैं।
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‘अमर उजाला’ ने पूरे मामले की तफ्तीश के लिए मौके का जायजा लिया ग्रामीणों ने बताया कि बाबा से मिलने कई रसूखदार लोग आते थे। इनमें पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के कई नेता, प्रशासनिक अधिकारी और न्यायिक सेवा से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

आश्रम में सेवादार थे अमरदेव, अचानक बन गए बाबा

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ग्रामीणों का कहना है कि बाबा अमरदेव पांच साल पहले तक चायल के पास देवी मोड़ पर स्थित आश्रम में कथावाचक स्व. परमात्मा दास के सेवादार थे। महज चार साल पहले रूड़ा गांव का एक व्यक्ति बाबा को यहां लाया।

बाबा ने गांव के बाहर सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन पर एक कुटिया बनाई और उसमें रहने लगे। करीब एक साल कुटिया में रहकर संन्यासी धर्म का पालन किया। अचानक अगले तीन साल में इतने बदलाव हुए कि वे राजनीतिक पार्टियों के बीच चर्चित हो गए।

एक के बाद एक तीन महंगी गाड़ियों के मालिक बन गए। साथ ही भव्य मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। शुरुआत में लोगों को बाबा की रहनुमाई पसंद आई। ग्रामीण भी भव्य मंदिर निर्माण से खुश थे, लेकिन तालमेल ज्यादा नहीं चल पाया। 

कभी सेवादार थे बाबा, अब आलीशान गाड़ियों में घूमते हैं

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कथावाचक स्वर्गीय परमात्मा दास के शिष्य रवि ने बताया कि उन्होंने बाबा अमरदेव को कई बार उनके आश्रम चायल के पास देवी मोड़ में देखा है। वे वहां बतौर सेवादार काम करते थे। उनका कार्य आने-जाने वालों की सेवा करना था।

अब वे आलीशान गाड़ियों के मालिक हैं। बाबा अमरदेव के कथावाचक के सेवादार होने और आश्रम में बर्तन धोने की पुष्टि श्रीरामलोक मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह ठाकुर ने भी की है।  

दान में मिली हैं लग्जरी गाड़ियां : लक्ष्मी सिंह

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मंदिर समिति के प्रधान लक्ष्मी सिंह ठाकुर का कहना है कि बाबा की तीनों लग्जरी गाड़ियां दान में मिली हैं। पुजैरो गाड़ी लेकर कुछ लोग उनके सामने ही मंदिर में आए थे। बाबा ने जब गाड़ी की चाबी लेने से मना किया तो भक्तजन जबरन चाबी रख गए।

बाबा ने एक भी गाड़ी अपने पैसों से नहीं खरीदी। जो लोग आते थे, बाबा उन्हें सिर्फ मंदिर निर्माण के लिए दान देने को कहते थे। इसी दान से यह निर्माण हो रहा था। 

2019 तक था मंदिर निर्माण का संकल्प 
लक्ष्मी सिंह ने बताया कि बाबा अमरदेव ने वर्ष 2019 तक मंदिर के पूर्ण निर्माण का संकल्प लिया था। यह संकल्प पूरा होने से पहले ही विवाद बढ़ गया। मंदिर पूरा हो जाता तो यहां रोजगार के साधन खुल सकते थे। 

पुलिस की निगरानी में रामलोक मंदिर 

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रामलोक मंदिर में पुलिस तैनात की गई है। बेवजह किसी को आने की इजाजत नहीं है। हमीरपुर से पुलिस जवानों को मंदिर की सुरक्षा में तैनात किया है। पुलिस कर्मी मंदिर पहुंचने वाले लोगों की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज रहे हैं।

मंदिर में किसी भी तरह की गतिविधि नहीं चल रही है। बाबा की तीनों लग्जरी गाड़ियां मंदिर परिसर में खड़ी हैं। जहां बाबा अमर देव रहता था, उस कुटिया को भी सील कर दिया गया है। 

पुलिस तैनात है : एसपी 
पुलिस अधीक्षक अंजुम आरा ने बताया मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। वहां नियमित रूप से गार्द तैनात है, ताकि कोई किसी भी तरह का विवाद न हो।

पुलिस ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, गेंद सीएम के पाले में

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रामलोक आश्रम के चर्चित बाबा अमरदेव और स्थानीय ग्रामीणों के बीच मारपीट मामले की जांच रिपोर्ट पुलिस ने सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट पर बाबा के खिलाफ कार्रवाई का फैसला मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह करेंगे। वीरभद्र सरकार पर बाबा को संरक्षण देने का आरोप है। इस पर सीएम पहले ही कह चुके हैं उनका बाबा से कोई लेना देना नहीं है। 

बाबा और ग्रामीणों के बीच हुई मारपीट और सरकार जमीन पर बाबा के कब्जे की जांच के लिए तीन दिन पहले आईजी जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट पहुंचने के साथ ही बाबा को संरक्षण देने के आरोपों में घिरी सरकार के पाले में गेंद आ गई है।

जांच टीम ने घटनास्थल के अलावा, राजस्व अभिलेखों और सरकारी अधिकारियों के अलावा बाबा अमरदेव और विपक्ष के करीब तीस से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे बाबा के

सरकारी जमीन हड़पने और लोगों से हुई मारपीट के प्रकरण में बाबा की गलती सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने तलवार से एक महिला पर जानलेवा हमला किया। रिपोर्ट मिलने के बाद अब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पर निर्णय लेना है।

बाबा समर्थकों और ग्रामीणों के बीच जमकर हुई थी मारपीट

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पिछले महीने के आखिरी हफ्ते में बाबा समर्थकों और ग्रामीणों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। मारपीट में बाबा और एक महिला समेत कई लोगों को चोटें आई थीं। इस प्रकरण में तत्कालीन कंडाघाट पुलिस के एसएचओ ने दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज किया था।

बाबा से अस्पताल में सरकार के कई मंत्रियों की मुलाकात के बाद पूरे थाने को ही स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रकरण के बाद से ही सरकार पर बाबा को संरक्षण देने के आरोप लग रहे थे। हालांकि, सार्वजनिक मंचों पर खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बाबा को संरक्षण देने की बात से इंकार करते रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि बाबा के खिलाफ लोगों के आक्रोश को देखते हुए ही सरकार बैकफुट पर आ गई थी और आईजी जहूर जैदी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था। अब रिपोर्ट पहुंचने के साथ ही सरकार पर बाबा प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।

मारपीट के प्रकरण में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बाबा को पुलिस प्रोटेक्शन मुहैया कराई गई है। वर्तमान में हिमाचल पुलिस के दो जवान बाबा के साथ सुरक्षा में तैनात है, जबकि आधा दर्जन पुलिस कर्मी आश्रम की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। 

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