Himachal News: बरसात में आई आपदा ने बहुत पीछे धकेल दिया हिमाचल को, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हुई नष्ट
आपदा ने भी हिमाचल प्रदेश को बहुत पीछे धकेल दिया है। इससे हिमाचल प्रदेश की करीब 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो चुकी है। राज्य का आधारभूत ढांचा तक बिगड़ गया है।
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2023 में बरसात में आई आपदा ने भी हिमाचल प्रदेश को बहुत पीछे धकेल दिया है। इससे हिमाचल प्रदेश की करीब 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो चुकी है। राज्य का आधारभूत ढांचा तक बिगड़ गया है। यहां सड़कें टूट-फूट गई हैं, जिन्हें दुरुस्त करने के लिए बहुत धन की जरूरत है। कई भवन जमींदोज हो गए। खेती योग्य भूमि भी नष्ट हो चुकी है। राज्य सरकार को आपदा प्रभावितों को करीब 4,000 करोड़ रुपये का अपना पैकेज ही देना पड़ा है। इसके लिए बजट की व्यवस्था राज्य को अपने उपलब्ध संसाधनों से करनी पड़ी है। कई विभागों में विकास के लिए तय बजट में भी कटौती करनी पड़ी है। खर्चों को कम करने और आमदनी बढ़ाने के लिए विधायकों से भी सुझाव मांगे गए हैं। राज्य के पास प्राकृतिक संसाधनों के अकूत भंडार हैं, मगर इनका ठीक से उपयोग नहीं हो सका है। आमदनी बढ़ाना आसान नहीं है।
2,000 करोड़ की सालाना आमदनी का लक्ष्य रखा वाटर सेस से
सुक्खू सरकार ने वाटर सेस से 2,000 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी का लक्ष्य रखा है। यह सेस बिजली परियोजनाओं पर हिमाचल के जल संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए लगाया जा रहा है। वाटर सेस की वसूली और इससे जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक आयोग की स्थापना की गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकार को चेताया है कि वह बिजली परियोजनाओं से किसी भी तरह के टैक्स की ड्यूटी और सेस जो विकास शुल्क या फंड के नाम पर लगाया जा रहा है, उसे लेना तुरंत बंद करे। मामला अदालत तक पहुंच चुका है।
2900 करोड़ की सीलिंग भी बनी परेशानी
बाह्य वित्तपोषित योजनाओं के लिए पहले ऋण लेने की कोई सीमा नहीं थी। विश्व बैंक, जीका, एडीबी आदि से खुला कर्ज लिया जा सकता था। हाल ही में आगामी तीन वर्षों के लिए ऐसी योजनाओं पर 2,900 करोड़ रुपये की सीलिंग लगाई गई है। यानी एक साल में लगभग 950 करोड़ रुपये का ही कर्ज लिया जा सकेगा। राज्य में एडीबी से वित्तपोषित 2,700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तो अकेला पर्यटन और 1,500 करोड़ रुपये का रोप-वे का है। ऐसी कई परियोजनाएं अधर में फंसेंगी। छोटी काशी मंडी में बन रहे शिव धाम प्रोजेक्ट के काम में भी सीलिंग से प्रभाव पड़ने की आशंका है।
चालू वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 2.30 लाख के आसपास होगी प्रति व्यक्ति आय
हिमाचल प्रदेश का पिछले वित्त वर्ष का सकल घरेलू उत्पाद 1 लाख 95 हजार 404 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2023-24 के पूरा होने पर इसके करीब दो लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान है। वर्ष 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 2 लाख 22 हजार 227 रुपये रहने का अंदाजा था, जो चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में करीब 2.30 लाख रुपये के आसपास अनुमानित होगी।
जूझती रही सुक्खू सरकार, अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लेने पड़े कड़े फैसले
हिमाचल प्रदेश में अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार ने कई कड़े फैसले लेने की शुरुआत कर दी है। खर्च घटाने की दिशा में कुछ कदम उठाए गए हैं। हिमाचल भवन, सदन और राज्य सरकार के आवास गृहों में मंत्रियों, विधायकों समेत अन्य वीआईपी को सस्ती दरों पर कमरे मिलते थे। इनके लिए विशेष रियायतें दी गईं। इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ी। सीएम खुद इलेक्ट्रिक गाड़ी में आवाजाही कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से लीज राशि का भुगतान न करने पर वाइल्ड फ्लॉवर हॉल को कब्जे में लेने जैसे साहसपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। बोडों-निगमों में अध्यक्षों- उपाध्यक्षों की ताजपोशियों को लंबित किया गया है। कैबिनेट विस्तार भी आहिस्ता- आहिस्ता किया गया। मंत्री का एक पद अभी भी खाली है। 2011-12 के बाद स्टांप ड्यूटी पर शुल्क बढ़ाया है। शपथ-पत्र और नकल लेने के लिए लगाए जाने वाले आवेदनों पर तीन गुना ज्यादा स्टांप शुल्क लेने का निर्णय हुआ है। स्टांप ड्यूटी को दस मुना बढ़ाया है। हालाकि, महिलाओं को इसमें विशेष रियायत दी गई है।