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रेलवे स्टेशन छिनने के डर से 17 वर्षों बाद दिया किसानों को मुआवजा

Tue, 28 Apr 2015 04:38 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊना
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊना Updated Tue, 28 Apr 2015 04:38 PM IST
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railways assigned to the Court of farmers draft of Rs 35 lakh.
17 वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार हिमाचल के दो किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा मिल ही गया। अदालत के सख्त आदेशों के बाद रेलवे विभाग को मुआवजे की राशि देने को मजबूर होना पड़ा।
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मेला राम और मदन लाल इसके लिए तहेदिल से अदालत का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। अगर कोर्ट इस मामले में जनशताब्दी को किसानों के हवाले करने का ऐतिहासिक फैसला नहीं सुनाता तो शायद आज भी रेलवे विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंगती।
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उत्तर रेलवे ने किसानों के मुआवजे का डिमांड ड्राफ्ट ऊना कोर्ट में जमा करवा दिया है। भारतीय रेलवे के लैंड एक्युजीशन विभाग की ओर से सोमवार को दोनों किसानों के नाम पर करीब 35 लाख की राशि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की मार्फत जमा करवाई गई।
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एडीजे मुकेश बंसल की अदालत ने अपने अहम फैसले में पहले दिल्ली से ऊना आने वाली जनशताब्दी ट्रेन को अटैच कर किसानों के हवाले करने के आदेश जारी किए थे।


इसके बाद में अदालत ने इससे लोगों को होने वाली परेशानी पर संज्ञान लेते हुए चुरडू़ रेलवे स्टेशन की संपत्ति जब्त करने का फैसला सुनाया था।

17 वर्षों के बाद जीती हक की लड़ाई

railways assigned to the Court of farmers draft of Rs 35 lakh.

दोनों परिवारों की जमीन ऊना-अंब ट्रैक के लिए 1998 में अधिगृहित की गई थी। इसमें स्‍थानीय किसान मेला राम का 8 लाख 91 हजार 424 जबकि मदन लाल का 26 लाख 53 हजार 814 रुपये मुआवजा बनता था।

लेकिन कई साल कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद उतरी रेलवे ने किसानों को मुआवजा देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। ऐसे में दोनों किसानों ने अपनी जमीन तो गंवाई ही। मगर रेलवे विभाग के दफ्तर के चक्कर काटते काटते वह हताश हो चुके थे। रेलवे के अफसरों के समक्ष हाथ जोड़कर गुहार लगाई मगर कोई फायदा नहीं हुआ।

उत्तर रेलवे के अधिवक्ता मोहन लाल भूंचाल ने डीडी जमा करवाने की पुष्टि की है। मामले की आगामी सुनवाई दो मई को निर्धारित की गई है।

तब आया अदालत का ऐतिहासिक फैसला

railways assigned to the Court of farmers draft of Rs 35 lakh.

इसी दौरान मामले की सुनवाई करते हुए 16-12-2011 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने रेलवे को प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि देने के आदेश दिए।

मगर रेलवे ने इन आदेशों को वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में चुनौती दी। यहां उतर रेलवे की याचिका पर उच्च न्यायालय ने छह महीने के लिए ऑर्डर पर स्टे किए। इस समय अवधि में रेलवे को मुआवजा राशि प्रभावित किसानों को देने को कहा गया। मगर बावजूद इसके एक फिर रेलवे बेपरवाह रहा।

इसके बाद प्रभावितों की ओर से दोबारा एडिशनल सेशन कोर्ट में एक्जीक्यूशन के लिए केस दायर किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए 9 अप्रैल 2015 को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जन शताब्दी ट्रेन को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं।

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