शिमला में गुमनाम हो रही टैगोर की रिहायश
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बालूगंज और चौड़ा मैदान के बीच स्थित 1893 के अक्तूबर और नवंबर में इस भवन को रबींद्रनाथ टैगोर ने अपना निवास स्थान बनाया था। इस मकान में रबींद्रनाथ टैगोर ने आठ कविताएं लिखीं थीं। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक भवन का संरक्षण करने में नाकाम साबित हो रही है। यह भवन आज भी निजी संपत्ति है। वुडफील्ड हाउस को आज के समय में योगदा आश्रम के नाम से जाना जाता है।
1893-94 में रबींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई भारतीय नागरिक सेवा के प्रथम भारतीय तथा संगीतकार सत्येंद्रनाथ टैगोर ने इस भवन को करीब आठ महीने के लिए किराये पर लिया था। बंगाल महिला आंदोलन की प्रमुख उनकी पत्नी नंदिनी देवी और उनकी बेटी इंदिरा भी उनके साथ रहीं। रबींद्रनाथ टैगोर उनके साथ यहां रहे थे। इस मकान में रबींद्रनाथ टैगोर ने आठ कविताएं लिखीं थीं। वर्तमान में यह ऐतिहासिक भवन जर्जर हो गया है।
बोर्ड पर लिखा है पूरा इतिहास
वुडफील्ड हाउस के ऊपर एक बोर्ड लगा है। इसे हिमाचल के तत्कालीन मुख्य सचिव एमएस मुखर्जी ने 23 अप्रैल 1993 को लगाया था। हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही सफेद पत्थर पर यह लिखा है कि टैगोर यहां कब आए। उन्होंने यहां क्या किया और कौन-कौन उनके साथ था।
टैगोर के कमरे में रहती है बुजुर्ग महिला
वुडफील्ड हाउस के जिस कमरे में रबींद्रनाथ टैगोर ने रचनाकर्म किया, उसमें एक बुजुर्ग किरायेदार उर्मिला गुप्ता अकेले रहती हैं। उर्मिला गुप्ता यहां योगदा सोसाइटी का सत्संग आयोजित करती हैं। इन दिनों बुजुर्ग महिला गुड़गांव गई हुई हैं।
ऐतिहासिक भवन की सुध ले सरकार
नगर निगम के मनोनीत पार्षद संजय परमार बताते हैं कि उन्होंने अपने बुजुर्गों से इस भवन की ऐतिहासिकता के बारे में सुना है। बुजुर्गों ने बताया है कि जिस कमरे में बुजुर्ग महिला रहती हैं, वहां कभी रबींद्रनाथ टैैगोर रहते थे। संजय परमार ने राज्य सरकार से इस ऐतिहासिक भवन की सुध लेने की मांग की है।