सीएम साहब! कब पूरी होगी कर्मचारियों की ये मांगें
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पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ और एसएमसी पीरियड बेसिस टीचर एसोसिएशन के शिक्षकों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भेंट की और उनके समक्ष अपनी मांगों को रखा। अलग अलग मिले प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों की पूरा करने का आश्वासन दिया।
पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से अनुबंध पर नहीं आए पीटीए शिक्षकों को अनुबंध शिक्षकों के मानदेय का 95 फीसदी देने की मांग की। अभी पीटीए शिक्षकों को 75 फीसदी मानदेय मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करीब 1200 पीटीए शिक्षक अनुबंध पर नहीं आ पाए, जिस कारण इन शिक्षकों ने प्रदेश सरकार से मानदेय में इजाफा करने की मांग की है।
शिक्षकों को होगा इतना फायदा
पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ के अध्यक्ष विवेक मेहता ने कहा कि इससे पीटीए शिक्षकों के मानदेय में 2700 से 2800 रुपये का इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांग को मान लेती है तो पीटीए लेक्चरर को 10875 से 14500, टीजीटी को 10525 से 13900 और सीएंडवी को 10125 से करीब 13500 मानदेय मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा पीरियड बेस लगे पीटीए, क्राफ्ट और एलटी शिक्षकों की समस्याएं रखीं, जिसे मुख्यमंत्री ने पूरा करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में महासचिव शिशुपाल गाजटा, सुमित कुमार, अनुपमा, मंजू कु मारी, अजय कुमार, विद्या चौहान, अरुण कुमार, विपिन कुमार सहित कई शिक्षक शामिल हुए।
एक्सटेंशन देने का आश्वासन
हिमाचल प्रदेश में आरएंडपी नियमों के तहत पीरियड बेसिस पर लगे एसएमसी शिक्षकों को मुख्यमंत्री वीरभद्र ने एक्सटेंशन देने का आश्वासन दिया।
एसएमसी पीरियड बेसिस टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पितान और महासचिव मनोज रोंगटा ने कहा कि संघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष करीब 1600 शिक्षकों की 31 दिसंबर को समाप्त हो चुके एक साल के सेवाकाल और 900 शिक्षकों के मार्च में समाप्त होने वाले सेवाकाल को एक्सटेंड करने की मांग की थी।
मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना और पूरा करने की बात कही।
सरकार से मांगा सचिवालय भत्ता
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य सचिवालय में नियुक्त अनुबंध कर्मचारियों को सचिवालय भत्ता दिया जाए। संगठन ने शिमला स्थित सचिवालय में एक जनरल हाउस का आयोजन किया।
इसमें सरकार को चेतावनी दी गई कि अगर मांगों पर गौर नहीं किया गया तो एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। संगठन के चुनाव मार्च के पहले सप्ताह में करवाने का भी फैसला लिया गया।
संगठन के वरिष्ठ उपप्रधान संजीव शर्मा ने इस अवसर पर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अनुबंध कर्मचारियों को राज्य सचिवालय भत्ता देने की मांग की तो दूसरी ओर सचिवालय में अधिकारियों को सत्कार भत्ता नहीं देने का अनुरोध भी किया।
उठाई गई ये मांगें
इस मौके पर यह भी मांग उठाई गई कि 260 पद खाली पड़े हैं। कनिष्ठ सहायकों को 2.50 साल का सर्विस रिलेक्सेशन देकर इन्हें पदोन्नत कर खाली पदों को भरा जाना चाहिए।
उन्होंने आईएएस अधिकारियों का काडर कम करने की भी मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि हिमाचल की जनसंख्या वर्तमान में 70 लाख है और यहां पर आईएएस का काडर 147 है और उत्तराखंड की एक करोड़ है, जबकि वहां का काडर 100 का है।
इस मौके पर संगठन के संयुक्त सचिव भूपेंद्र बाबी, उपप्रधान एमडी शर्मा, कोषाध्यक्ष कमलजीत सिंह, कार्यकारिणी के सदस्य तेजराम, खेमचंद, रोहित मेहता आदि ने विशेष रूप से संबोधित किया।
पैट को मांगें पूरी होने की आस
वहीं, प्राथमिक सहायक अध्यापक (पैट) संघ प्रदेशभर में एकजुट होकर कार्य कर रहा है। किसी भी स्तर पर संघ में कोई विरोधाभास नहीं है। यह बात पैट संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन ठाकुर ने पूरी प्रदेश कार्यकारिणी की ओर से प्रेस बयान जारी करते हुए कही।
प्रदेश मीडिया प्रभारी चंदन नेगी ने कहा कि पैट अध्यापकों को आशा है कि उनकी ट्रेनिंग की एक्सटेंशन, वेतन वृृद्धि, स्थानांतरण पालिसी और कुल्लू जिले के पैट अध्यापकों के 2011 और 2012 में किए प्रशिक्षण के देय टीए और डीए को जारी करवाने आदि मांगों को सरकार शीघ्र पूरा करेगी।
संघ ने पैट के विरुद्ध बयानबाजी करने वालों को ऐसा नहीं करने को कहा। साथ ही यह भी कहा कि पैट की नियुक्तियां 2003 से 2007 तक हुई हैं। उस समय वे जेबीटी बेरोजगार नहीं थे जो आज पैट का विरोध कर रहे हैं। उन जेबीटी बेरोजगारों का प्रशिक्षण तो 2008 के बाद हुआ है और पैट तो 2003 से 2007 तक नियुक्त किए गए हैं।