किसान आंदोलन के समर्थन में वामपंथी संगठनों ने हिमाचल में किया प्रदर्शन
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किसान विरोधी कानूनों को लेकर संघर्षरत किसानों के समर्थन में गुरुवार को सीटू, हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एसएफआई और दलित शोषण मुक्ति मंच ने प्रदेश भर में प्रदर्शन किए। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, किसान सभा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर, महासचिव डॉ. ओंकार शाद, महिला समिति प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीना सिंह, सचिव फालमा चौहान, डीवाईएफआई प्रदेशाध्यक्ष अनिल मनकोटिया, सचिव चंद्रकांत वर्मा, एसएफआई प्रदेशाध्यक्ष रमन थारटा, सचिव अमित ठाकुर, दलित शोषण मुक्ति मंच संयोजक जगत राम व सह संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि मोदी व खट्टर की भाजपा सरकारें किसानों को कुचलने पर आमादा हैं।
कहा कि किसान आंदोलन को दबाने से जाहिर हो चुका है कि ये दोनों भाजपा सरकारें पूंजीपतियों घरानों के साथ हैं व उनकी मुनाफाखोरी को सुनिश्चित करने के लिए किसानों की आवाजा को दबाना चाहती हैं। मोदी सरकार के तीनों नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं। किसानों की फसलों को कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये विदेशी और देशी कंपनियों और बड़ी पूंजीपतियों के हवाले करने की साजिश रची जा रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के कानून को खत्म करने से जमाखोरी, कालाबाजारी व मुनाफाखोरी को बढ़ावा मिलेगा। कृषि कानूनों के बदलाव से बड़े पूंजीपतियों और देशी-विदेशी कंपनियों का कृषि पर कब्जा हो जाएगा और किसानों की हालत दयनीय हो जाएगी।
किसान आंदोलन से सामान की सप्लाई 60 फीसदी तक प्रभावित
वहीं, दिल्ली में किसान आंदोलन के चलते प्रदेश भर में बाहरी राज्यों से आने वाले सामान की सप्लाई करीब 60 प्रतिशत तक प्रभावित हुई है। सब्जी, कपड़ा, बाहरी राज्यों आने वाली दालों और राशन सहित अन्य सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। दिल्ली में किसान आंदोलन अनिश्चितकाल की ओर बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
गौर हो कि ऊना जिले के अधिकतर कारोबारी दिल्ली और पंजाब के लुधियाना, अमृतसर व जालंधर से ही सामान लाते हैं। ट्रांसपोर्टर भी कारोबारियों का सामान सप्लाई करने से मना कर रहे हैं। उधर, व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष सोमेश शर्मा ने कहा कि किसान आंदोलन के चलते सब्जी, कपड़ा सहित बाहरी राज्यों आने वाली दालों व अन्य सामान की सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है।
स्टोर किए गए सामान से ही काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब से कुछेक सामान की सप्लाई मिल रही है। आठ दिसंबर से ट्रांसपोर्ट भी हड़ताल पर जाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में अगर ट्रांसपोर्ट हड़ताल पर जाते हैं तो कारोबारियों की परेशानी और भी बढ़ सकती हैं। कहा कि अगर किसान आंदोलन खत्म न हुआ तो कारोबार को लेकर लोगों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
ऊना से 6 को दिल्ली जाएंगे किसान
किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रदेश से 600 से अधिक किसान दिल्ली कूच करेंगे। इनमें ऊना जिले के पांचों ब्लॉकों से भी 6 दिसंबर को 50 से अधिक किसान दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए जाएंगे।
मनाली से अब चंडीगढ़ के लिए ही चलेंगी बसें
मनाली से दिल्ली के बीच चलने वाली सभी बसों को अब चंडीगढ़ तक ही चलाया जा रहा है। पहले ये बसें कुंडली बॉर्डर तक चलाई जा रही थीं। एचआरटीसी के कुल्लू डिपो की दो बसें आठ दिन से दिल्ली में फंसी हैं। आंदोलन लंबा चलने से जिले में सब्जियों के दाम बढ़ने की संभावना है।