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सीएम जयराम बोले- मादक द्रव्यों के 19 मामलों में 11.37 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

Sun, 23 May 2021 07:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 23 May 2021 07:39 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में एक वर्ष में 19 विभिन्न मामलों में 11.37 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच और फ्रीज की गई। 2126 मामले दर्ज किए गए और 2909 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रविवार को यह जानकारी दी।

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Properties worth Rs. 11.37 crores attached in 19 drug related cases: CM Jairam Thakur
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रविवार को कहा कि प्रदेश सरकार नशीली दवाओं की तस्करी से निपटने के लिए बहु आयामी रणनीति अपनाकर राज्य को ‘ड्रग फ्री स्टेट’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य पुलिस को बड़े नशा तस्करों के अलावा छोटे तस्करों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भांग और अफीम की अवैध खेती को नष्ट करने और नशा तस्करों की संपत्ति अटैच करने के कदम उठाए गए हैं।

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एक जनवरी 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक एनडीपीएस अधिनियम की संबंधित धारा के तहत कुल 2126 मामले दर्ज किए गए हैं और 2909 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। प्रदेश में पिछले एक वर्ष में 19 विभिन्न मामलों में 11.37 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच और फ्रीज की गई। सीएम ने कहा कि 7917 बीघा जमीन में करीब 12.52 लाख भांग के पौधे और 52 बीघा भूमि में अफीम के 2.66 लाख पौधे नष्ट किए गए हैं।
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भू स्वामियों और अपराधियों के विरुद्ध 161 मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में पुलिस ने मंडी जिले के पधर की टिक्कन उप तहसील के तहत चौहार घाटी में 66 बीघा भूमि पर 10 करोड़ रुपये मूल्य के 15 लाख अफीम के पौधों की अवैध खेती का पता लगाने में सफलता हासिल की है। एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपराधियों की नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार से अर्जित चल और अचल संपत्तियों को अटैच करने के लिए वित्तीय जांच की गई है।
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जिला कुल्लू में 15 मामलों में  3.79 करोड़ रुपये की संपत्ति, जिला कांगड़ा में दो मामलों में 7.29 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, जिला बिलासपुर के एक मामले में 18.31 लाख रुपये और जिला शिमला के एक मामले में 10.67 लाख रुपये के बैंक डिपॉटिज फ्रीज किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल पुलिस की ओर से मादक द्रव्यों के खतरे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के प्रयास की प्रशंसा करते हुए पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस प्रवर्तन निदेशालय के सहयोग से ऐसे अपराधियों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत जांच करने पर विचार कर रही है।

डीएपी खाद पर उपदान बढ़ाने का लाखों किसानों को लाभ: जयराम

सब्सिडी बढ़ाने के बाद डीएपी खाद के दामों में एकाएक आई गिरावट से हिमाचल प्रदेश के लाखों किसानों को इसका लाभ होगा। हिमाचल प्रदेश में डायमोनियम फास्फेट की वार्षिक खपत 1200-1500 मीट्रिक टन है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को डायमोनियम फास्फेट उर्वरक पर अनुदान में 140 प्रतिशत वृद्धि कर राहत दी है। उन्होंने इसके लिए उनका आभार जताया है। 

सीएम ने कहा कि वर्तमान में किसानों को इस उर्वरक पर मिल रहे अनुदान को 500 रुपये प्रति बैग से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति बैग कर किया गया है। कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके मूल्य में वृद्धि के बावजूद किसानों को यह उर्वरक 1200 रुपये प्रति बैग के पुराने मूल्य पर उपलब्ध होगा। डायमोनियम फास्फेट भारत में दूसरा सबसे अधिक प्रयोग होने वाला उर्वरक है। हिमाचल में डायमोनियम फास्फेट की वार्षिक खपत 1200-1500 मीट्रिक टन है।

किसान इस उर्वरक को सामान्य रूप से रबी के मौसम में आलू और गेहूं की फसल में बुआई से ठीक पहले या बुआई के समय प्रयोग करते हैं। हिमाचल में ऊना, कांगड़ा और पांवटा साहिब और नालागढ़ के कुछ क्षेत्रों में इस उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। गत वर्ष डायमोनियम फास्फेट का वास्तविक मूल्य 1700 रुपये प्रति बैग था। इस पर केंद्र सरकार 500 रुपये प्रति बैग का अनुदान दे रही थी। हाल ही में डायमोनियम फास्फेट में प्रयोग होने वाले फास्फोरिक एसिड, अमोनिया इत्यादि के मूल्य में 60 से 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस कारण डायमोनियम फास्फेट की प्रति बैग कीमत 2400 रुपये हो गई थी। 

वर्तमान में प्रदेश में उर्वरक की खपत 63 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में उर्वरक की खपत 63 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 132 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। राज्य में उर्वरक वितरण प्रणाली सहकारिता नेटवर्क के अंतर्गत है। उर्वरक का वितरण 2143 सहकारी सभाओं और डिपो धारकों के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार ने उर्वरक वितरण कार्य हिमफेड को सौंपा है। इफ्को को भी उसकी 620 संबद्ध सभाओं के माध्यम से आपूर्ति कार्य के लिए मंजूरी दी गई है।

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