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Shimla News: शहर में 261 करोड़ की परियोजनाएं अधूरी, जनता को राहत का इंतजार

Fri, 27 Dec 2024 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 11:55 PM IST
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projects works delay
खलीनी और विधानसभा फ्लाईओवर का काम 4 साल बाद भी जमीन पर नहीं हुआ शुरू
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शहर की 6 पार्किंगों का निर्माण कार्य अगले साल ही होगा शुरू

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शिमला में 261 करोड़ रुपये की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं यातायात और आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए शुरू की गई थीं, लेकिन प्रशासनिक देरी, तकनीकी अड़चनों और निर्माण कार्यों में सुस्ती के चलते अधिकांश परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो सकी हैं।
इनमें फ्लाईओवर, पार्किंग निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं की देरी से न केवल शहरवासियों को परेशानी हो रही है, बल्कि यातायात और दुर्घटनाओं की समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं।
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खलीनी फ्लाईओवर, जिसकी लागत 17.68 करोड़ रुपये है, अभी तक स्वीकृति के लिए चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के कार्यालय में अटका हुआ है। यह फ्लाईओवर बीसीएस और टॉलैंड से खलीनी चौक की ओर आने वाले वाहनों के दबाव को कम करने के लिए बनाया जाना है। निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अब 2025 में ही संभव होगा। इसी प्रकार विधानसभा के पास बनने वाले 220 मीटर लंबे फ्लाईओवर, जिसकी लागत 33 करोड़ रुपये है, इसका काम भी रेलवे की लिखित मंजूरी न मिलने के कारण लटका हुआ है। इस फ्लाईओवर से कार्ट रोड पर यातायात सुगम होने की उम्मीद थी। इन दोनों परियोजनाओं में देरी से शहर में जाम की समस्या बनी हुई है।
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शहर में पार्किंग की कमी को दूर करने के लिए 77.5 करोड़ रुपये की लागत से विकासनगर, कसुम्पटी, आईजीएमसी और टुटू सहित अन्य स्थानों पर पार्किंग परियोजनाएं शुरू की गईं, लेकिन अधिकांश निर्माण कार्य देरी की मार झेल रहे हैं। आईजीएमसी के पास तीन पार्किंग कांप्लेक्स, जिनकी लागत 43 करोड़ रुपये है, 2024 तक पूरे होने थे, लेकिन अब 2025 तक ही संभव हैं। कसुम्पटी में 17 करोड़ रुपये की लागत से बन रही तीन मंजिला पार्किंग और विकासनगर में 13 करोड़ रुपये की लागत से बन रही पार्किंग भी 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है। टुटू में 4.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही चार मंजिला पार्किंग का काम भी अगले साल ही पूरा होगा। सड़कों के चौड़ीकरण और सुधार के लिए 122 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना, जिसमें एमडीआर 66 और एमडीआर 67 सड़कें शामिल हैं, भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण अटकी हुई है। इस परियोजना से न केवल यातायात सुगम होना था, बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा में भी सुधार होना था।

शहर में अन्य छोटी परियोजनाओं, जैसे लक्कड़ बाजार बस अड्डे को जोड़ने वाली लिफ्ट जो 11 करोड़ रुपये से बनाई जा रही है, उसका काम भी तय समय से पीछे चल रहा है। निर्माण कार्यों में देरी से परियोजनाओं की लागत भी बढ़ रही है। इन सभी परियोजनाओं की धीमी प्रगति के कारण शहरवासी अब भी यातायात जाम, पार्किंग की कमी और निर्माण से होने वाली असुविधाओं का सामना कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इन परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाएगा, लेकिन जनता को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही।
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