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Shimla News: राजधानी में 24 घंटे पानी देने की योजना की जांच पूरी, सीएम को सौंपी रिपोर्ट
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
कमेटी अध्यक्ष एवं शहरी विकास विभाग के निदेशक ने रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी, योजना में मिली है खामियां
872 करोड़ रुपये की पेयजल योजना के काम में देरी
पेनल्टी न लगाने, जल्दबाजी काम सौंपने के लगे हैं आरोप
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की 872 करोड़ रुपये की योजना के काम पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बैठाई जांच पूरी हो गई है। जांच कमेटी अध्यक्ष एवं शहरी विकास विभाग के निदेशक नीरज कुमार ने अंतिम रिपोर्ट तैयार कर इसे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है।
अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई पर फैसला लेंगे। इस योजना के कार्यान्वयन में बड़े गोलमाल होने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों और पेयजल कंपनी के ही एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस योजना की जांच के आदेश जारी किए थे। शहरी विकास विभाग के निदेशक और हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के निदेशक को इन आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा था। इस योजना में काम में देरी होने के बावजूद ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी दिखाने, करोड़ों रुपये की पेनल्टी न लगाने, अधूरे काम के बावजूद नए काम के पैकेज देने, काम सबलेट करने जैसे आरोप लगे हैं।
जांच कमेटी ने इन आरोपों की सत्यता जांचने के लिए पेयजल कंपनी से रिकॉर्ड तलब किया था। सरकार को मिले शिकायत पत्र के आधार पर इनकी जांच की गई है। सूत्रों के अनुसार जांच में काम में देरी होने, देरी के बावजूद पेनल्टी न लगाने जैसे तथ्य उजागर हुए हैं। इसके अलावा समय पर वार्डाें में काम पूरा करवाने, साइट क्लीयरेंस जैसे मामलों में पेयजल कंपनी की खुद की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। कंपनी अब तक पांच पैकेज का काम ठेकेदार को सौंप चुकी है लेकिन नौ महीने बाद एक भी पैकेज का काम पूरा नहीं है। ठेकेदार कंपनी पर लगाई गई पेनल्टी समेत जल प्रबंधन निगम की ओर से अब तक करवाए गए काम और किए गए भुगतान को भी रिपोर्ट में शामिल किया है। हालांकि कंपनी पर लगे आरोप कितने सही हैं, इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया है। रिपोर्ट सामने आने पर ही सच सामने आएगा कि आखिर इस योजना में गड़बड़ी हुई है या नहीं, यदि हुई है तो सरकार इस पर क्या कार्रवाई करेगी। फिलहाल जांच कमेटी इस पर कुछ भी कहने से बच रही है।
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कंपनी का दावा, एग्रीमेंट के अनुसार ही काम
शिमला में 24 घंटे पानी देने की योजना का काम करवा रही पेयजल कंपनी शिमला जल प्रबंधन निगम का दावा है कि एग्रीमेंट के अनुसार ही योजना का काम हो रहा है। ठेकेदार कंपनी को एग्रीमेंट के अनुसार ही नए काम और पैसों का भुगतान किया है। काम में देरी को लेकर नियमानुसार जो पेनल्टी बनती थी, वह लगाई गई है। सभी औपचारिकताएं और मंजूरी लेने के बाद ही ठेकेदार कंपनी को पैकेज दिए जा रहे हैं। एग्रीमेंट के अनुसार ही काम सबलेट की अनुमति दी जाती है। ऑपरेशन और मेंटेनेंस का पैसा एग्रीमेंट के अनुसार ही दिया है। कंपनी के महाप्रबंधक राकेश पराशर ने कहा कि इस योजना में एग्रीमेंट के अनुसार ही काम किया जा रहा है।
इन बिंदुओं पर तैयार की है जांच रिपोर्ट
ठेकेदार कंपनी को कितना काम सौंपा गया, अब तक कितना पूरा हुआ
कितने टैंकों का निर्माण हुआ, कुल 19 टैंक बनने थे
कितनी पेयजल लाइनें बिछी, कितने कनेक्शन दिए
काम में देरी के लिए कौन जिम्मेदार, पेनल्टी क्यों नहीं लगाई
सौंप दी है जांच रिपोर्ट
शिमला शहर में 24 घंटे पानी देने की योजना को लेकर बिठाई गई जांच पूरी कर ली गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दी गई है।
-नीरज कुमार, जांच कमेटी अध्यक्ष एवं निदेशक, शहरी विकास विभाग
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कमेटी अध्यक्ष एवं शहरी विकास विभाग के निदेशक ने रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी, योजना में मिली है खामियां
872 करोड़ रुपये की पेयजल योजना के काम में देरी
पेनल्टी न लगाने, जल्दबाजी काम सौंपने के लगे हैं आरोप
अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की 872 करोड़ रुपये की योजना के काम पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बैठाई जांच पूरी हो गई है। जांच कमेटी अध्यक्ष एवं शहरी विकास विभाग के निदेशक नीरज कुमार ने अंतिम रिपोर्ट तैयार कर इसे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है।
अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई पर फैसला लेंगे। इस योजना के कार्यान्वयन में बड़े गोलमाल होने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों और पेयजल कंपनी के ही एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस योजना की जांच के आदेश जारी किए थे। शहरी विकास विभाग के निदेशक और हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के निदेशक को इन आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा था। इस योजना में काम में देरी होने के बावजूद ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी दिखाने, करोड़ों रुपये की पेनल्टी न लगाने, अधूरे काम के बावजूद नए काम के पैकेज देने, काम सबलेट करने जैसे आरोप लगे हैं।
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जांच कमेटी ने इन आरोपों की सत्यता जांचने के लिए पेयजल कंपनी से रिकॉर्ड तलब किया था। सरकार को मिले शिकायत पत्र के आधार पर इनकी जांच की गई है। सूत्रों के अनुसार जांच में काम में देरी होने, देरी के बावजूद पेनल्टी न लगाने जैसे तथ्य उजागर हुए हैं। इसके अलावा समय पर वार्डाें में काम पूरा करवाने, साइट क्लीयरेंस जैसे मामलों में पेयजल कंपनी की खुद की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। कंपनी अब तक पांच पैकेज का काम ठेकेदार को सौंप चुकी है लेकिन नौ महीने बाद एक भी पैकेज का काम पूरा नहीं है। ठेकेदार कंपनी पर लगाई गई पेनल्टी समेत जल प्रबंधन निगम की ओर से अब तक करवाए गए काम और किए गए भुगतान को भी रिपोर्ट में शामिल किया है। हालांकि कंपनी पर लगे आरोप कितने सही हैं, इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया है। रिपोर्ट सामने आने पर ही सच सामने आएगा कि आखिर इस योजना में गड़बड़ी हुई है या नहीं, यदि हुई है तो सरकार इस पर क्या कार्रवाई करेगी। फिलहाल जांच कमेटी इस पर कुछ भी कहने से बच रही है।
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कंपनी का दावा, एग्रीमेंट के अनुसार ही काम
शिमला में 24 घंटे पानी देने की योजना का काम करवा रही पेयजल कंपनी शिमला जल प्रबंधन निगम का दावा है कि एग्रीमेंट के अनुसार ही योजना का काम हो रहा है। ठेकेदार कंपनी को एग्रीमेंट के अनुसार ही नए काम और पैसों का भुगतान किया है। काम में देरी को लेकर नियमानुसार जो पेनल्टी बनती थी, वह लगाई गई है। सभी औपचारिकताएं और मंजूरी लेने के बाद ही ठेकेदार कंपनी को पैकेज दिए जा रहे हैं। एग्रीमेंट के अनुसार ही काम सबलेट की अनुमति दी जाती है। ऑपरेशन और मेंटेनेंस का पैसा एग्रीमेंट के अनुसार ही दिया है। कंपनी के महाप्रबंधक राकेश पराशर ने कहा कि इस योजना में एग्रीमेंट के अनुसार ही काम किया जा रहा है।
इन बिंदुओं पर तैयार की है जांच रिपोर्ट
ठेकेदार कंपनी को कितना काम सौंपा गया, अब तक कितना पूरा हुआ
कितने टैंकों का निर्माण हुआ, कुल 19 टैंक बनने थे
कितनी पेयजल लाइनें बिछी, कितने कनेक्शन दिए
काम में देरी के लिए कौन जिम्मेदार, पेनल्टी क्यों नहीं लगाई
सौंप दी है जांच रिपोर्ट
शिमला शहर में 24 घंटे पानी देने की योजना को लेकर बिठाई गई जांच पूरी कर ली गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दी गई है।
-नीरज कुमार, जांच कमेटी अध्यक्ष एवं निदेशक, शहरी विकास विभाग