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विधायक प्राथमिकता स्कीम में माननीयों ने डाले ये कैसे प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Wed, 18 Apr 2018 08:59 AM IST
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क्या जनता को पीने के पानी या सिंचाई के बजाय सड़कों-पुलों की ज्यादा जरूरत है? इस बार विधायक प्राथमिकता में पीने के पानी और सिंचाई योजनाओं के स्थान पर कई विधायकों ने सड़कों तथा पुलों के प्रस्ताव ही डाले हैं।
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विधायक प्राथमिकता में कई एमएलए ने एक ही तरह की दो से ज्यादा स्कीमें डाली हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 की इन योजनाओं की डीपीआर बनेगी, जो बाद में नाबार्ड को जाएंगी।
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अगर चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमानों में माननीय विधायकों की ओर से निर्दिष्ट प्राथमिकताओं की सूची देखी जाए तो इसमें कई विधायकों ने सड़कों-पुलों के लिए निर्धारित दो योजनाओं के बजाय इसकी तीन से चार योजनाओं के प्रस्ताव बजट में डाले हैं।
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इन्हें पेयजल और सिंचाई योजनाओं के स्थान पर डाला है। जैसे कि घुमारवीं के विधायक ने दो सड़कों के अलावा दो अतिरिक्त पुलों को बनाने के लिए एक पेयजल और एक सिंचाई की स्कीम नहीं दी।
यानी, पीने के पानी और सिंचाई की एक-एक योजना को सड़कों-पुलों के लिए सरेंडर कर दिया। नाचन, सुंदरनगर, सरकाघाट, नाहन आदि निर्वाचन क्षेत्रों में भी सड़कों को खास महत्व दिया गया है।
योजना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि विधायक ऐसा कर सकते हैं। वे चाहें तो छहों योजनाएं सड़कों-पुलों की डाल सकते हैं। छहों पानी या सिंचाई स्कीमों की भी डाल सकते हैं। जिनके क्षेत्र में जिसकी ज्यादा जरूरत हो, वे उसी हिसाब से अपने प्रस्ताव डालते