हिमाचल: सुक्खू सरकार का पहला बजट बनाने के लिए विधायकों से मांगीं प्राथमिकताएं
योजना सलाहकार डॉ. बसु सूद ने सचिव योजना के हवाले से सभी उपायुक्तों को एक पत्र भेजा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वार्षिक बजट 2023-24 के निर्धारण के लिए सचिवालय में विधायक प्राथमिकताएं बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
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हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व की सरकार का पहला बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार सरकार के योजना विभाग ने विधायकों से प्राथमिकताएं मंगवाने का नया प्रयोग किया है। इस बार उपायुक्तों को यह काम दिया है कि वे विधायकों से संपर्क करें और उनसे दो-दो प्राथमिकताएं लें। दो-दो प्राथमिकताएं वास्तविक नई योजना मद में ली जाएं तो दो-दो चालू योजनाओं के तहत ली जाएं।
इस संबंध में योजना सलाहकार डॉ. बसु सूद ने सचिव योजना के हवाले से सभी उपायुक्तों को एक पत्र भेजा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वार्षिक बजट 2023-24 के निर्धारण के लिए सचिवालय में विधायक प्राथमिकताएं बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उपायुक्तों से कहा गया है कि वे विशेष संदेशवाहक भेजकर इस संबंध में सभी विधायकों को इन बैठकों के बारे में सूचित करें। केवल विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मंत्रियों को ही सूचित नहीं करना होगा।
सड़क, पेयजल, सिंचाई और सीवरेज की योजनाएं डाली जा सकेंगी
हिमाचल प्रदेश में विधायक सड़क, पेयजल, सिंचाई और सीवरेज की योजनाएं ही वार्षिक योजनाएं विधायक प्राथमिकता में डाली जा सकेंगी। इन्हें योजना विभाग के माध्यम से नाबार्ड के लिए वित्तपोषण को भेजा जा सकेगा।
अब एक और दो जनवरी को होंगी विधायक प्राथमिकता बैठकें
हिमाचल प्रदेश में विधायक प्राथमिकता बैठकें अब एक और दो फरवरी को होंगी। इससे पहले ये बैठकें 30 और 31 जनवरी को रखी गई थीं। यह राज्य सचिवालय के आर्म्सडेल भवन में रखी गई हैं।
शिमला पहुंचे करुणामूलक परिवार, सुक्खू से मांगी नौकरी
करुणामूलक आश्रित परिवारों के लोग वीरवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिलने राज्य सचिवालय शिमला पहुंचे। उन्होंने पूर्व सरकार की कमियों और खामियों को उजागर किया। पूर्व में करुणामूलक आश्रितों की ओर से की गई 432 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल के बारे में भी जानकारी दी गई। करुणामूलक नौकरियों की बहाली की भी गुहार लगाई गई। प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार की अध्यक्षता में सैकड़ों लोग करुणामूलक नौकरी की फरियाद लेकर सचिवालय पहुंचे। उहोंने कहा कि पिछली सरकार के समय में भी करुणामूलक आश्रितों ने काफी लंबा संघर्ष किया था।
इनकी ओर से 432 दिन कि भूख-हड़ताल की गई, लेकिन पूर्व सरकार इनको एक साथ नौकरियां देने में असमर्थ रही। उस समय विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस सरकार ने करुणामूलक नौकरी बहाली मुद्दे को जोरों-शोरों से उठाया था और चुनावी वायदे व कांग्रेस के मेनिफेस्टो में भी इस मुद्दे को प्राथमिकता मिली थी। आगामी कैबिनेट में पॉलिसी संशोधन करने और 5 लाख आय सीमा निर्धारित करने और एक व्यक्ति सालाना आय शर्त को हटाने की भी मांग उठाई। कोटे की शर्त को हमेशा के लिए हटाने और सभी विभागों, बोर्डों और निगमों में भी नौकरियां दिलाने की मांग उठाई गई।