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राष्ट्रपति ने नहीं स्वीकारी डॉक्टरेट ऑफ साइंस की मानद उपाधि, जानिए वजह

Tue, 22 May 2018 09:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सोलन
अमर उजाला ब्यूरो, सोलन Updated Tue, 22 May 2018 09:18 AM IST
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President Ram Nath Kovind did not accepted honorary degree of Doctorate of Science

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जिला सोलन के नौणी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी से डॉक्टरेट ऑफ साइंस की मानद उपाधि लेने से इंकार कर दिया है।

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विश्वविद्यालय प्रबंधन ने राष्ट्रपति को इस उपाधि से सम्मानित करने की पेशकश की थी। दीक्षांत समारोह में उन्हें उपाधि से नवाजा जाना था। बाकायदा तैयारियां पूरी कर ली गईं थीं। नौणी विवि ने जो बुकलेट प्रकाशित की थी उन पर भी राष्ट्रपति को मानद उपाधि से सम्मानित करने का जिक्र था।
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विवि प्रबंधन की ओर से तय समय के अनुसार राष्ट्रपति को यह उपाधि 11 बजकर 15 मिनट पर प्रदान की जानी थी लेकिन, ऐन मौके पर राष्ट्रपति ने यह उपाधि लेने से इंकार कर दिया।
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राष्ट्रपति ने कहा कि वे फिलहाल खुद को इस योग्य नहीं मानते हैं। इसलिए यह उपाधि स्वीकार नहीं कर पाएंगे। हालांकि वे मानद उपाधि देने के लिए विश्वविद्यालय की भावना की कद्र करते हैं। 

मानद उपाधि स्वीकार न करने का किया जिक्र

President Ram Nath Kovind did not accepted honorary degree of Doctorate of Science

 राष्ट्रपति भवन से मानद उपाधि स्वीकार न करने संबंधित पत्र रविवार शाम को जारी किया गया, ऐसे में नौणी विवि प्रबंधन बुकलेट व कार्यक्रम में मानद उपाधि से जुड़ा कोई फेरबदल नहीं कर पाया।

राष्ट्रपति ने सभागार में पहुंचते ही अपने संबोधन की शुरूआत में मानद उपाधि स्वीकार न करने का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नौणी विवि उद्यानिकी एवं वानिकी से जुड़ा हुआ विश्वविद्यालय है और वे यहां समारोह में हिस्सा लेने के लिए उत्सुक थे।

यही वजह है कि उन्होंने यहां से मिले निमंत्रण को सहज स्वीकार कर लिया। बकौल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद नौणी विवि में जो भी अनुभव उन्हें हासिल हुए हैं वे इन्हें अपने तक सीमित नहीं रखेंगे।

केंद्र स्तर पर 148 विश्वविद्यालय हैं जिनमें उनका आना-जाना रहता है। इसके बाद वे किसी भी दूसरे विवि में जाएंगे तो वहां वे नौणी के अनुभवों को जरूर साझा करेंगे।

शिक्षा से लेकर युद्धक विमान उड़ाने तक बेटियां सक्षम : राष्ट्रपति

President Ram Nath Kovind did not accepted honorary degree of Doctorate of Science

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो, खेलकूद का मैदान या युद्धक विमानों को उड़ाने की चुनौती। बेटियों ने हर जगह दमदार प्रदर्शन किया है।

नौणी विवि में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले नौ छात्रों में पांच बेटियां ही हैं। एक छात्रा ने तो दो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इसी विश्वविद्यालय का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि देश में वह जिस भी विश्वविद्यालय में गए हैं वहां बेटियों का प्रदर्शन शानदार रहा है।


उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम सार्थक साबित हो रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सोमवार को डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

विद्यार्थियों से देश के भाग्य विधाता बनने का आह्वान किया

President Ram Nath Kovind did not accepted honorary degree of Doctorate of Science

इस मौके पर उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों से देश के भाग्य विधाता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गान में भारत भाग्य विधाता की एक लाइन है जो मौजूदा दौरे के युवाओं पर सटीक बैठती है।

असल में युवा पौध ही देश की भाग्य विधाता साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने वालों को उन उत्साही युवाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने जीवन में लक्ष्य निर्धारित किए और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं।

वैज्ञानिकों को कृषि के क्षेत्र में बेहतरी के लिए सार्थक प्रयास करने की जरूरत है। सबका काम आखिरी गांव के आखिरी किसान तक केंद्रित होना चाहिए। 70 प्रतिशत लोगों को कृषि के क्षेत्र से रोजगार हासिल होता है। पूरे देश की खुशहाली कृषि पर निर्भर करती है इसलिए कृषि क्षेत्र में व्यापक प्रयास करके बदलाव लाने की जरूरत है। 

राष्ट्रपति बोले, जनता परेशान तो उनके आने का औचित्य क्या

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नाथ कोविंद ने प्रवास के दौरान शिमला शहर की जनता को हो रही परेशानियों पर चिंता जताई है। सूत्रों के अनुसार अमर उजाला अखबार पढ़ने के बाद उन्होंने प्रदेश सरकार को दोटूक कहा कि अगर उनके आने-जाने से आम जनता दिक्कत में है तो आने का औचित्य ही क्या है।

अव्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और सरकार को निर्देश दिए हैं कि जब उनकी मूवमेंट हो तो आम जनता को परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

रविवार शाम को रिट्रीट से राजभवन आने और जाने के दौरान शहर के लोगों और सैलानियों को जाम में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रात साढ़े नौ बजे तक शहर की कुछ ऐसी सड़कें भी सील रखी गई थीं, जहां से राष्ट्रपति का काफिला गुजरना ही नहीं था।

सड़कें सील होने के कारण शहर के लोगों को गाडि़यां बीच रास्ते में पार्क  कर अंधेरे में पैदल घरों तक पहुंचना पड़ा। राष्ट्रपति का काफिला गुजरते समय सड़कों पर पैदल चल रहे लोगों को भी पुलिस ने इधर-उधर खदेड़ दिया।

इतना ही नहीं, जगह-जगह सड़कें बंद होने के कारण सैलानियाें को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर राजधानी में जिला और पुलिस प्रशासन की पोल खुलकर रह गई है।

नगर निगम शहर के लोगों को पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा और रविवार को शहर की सड़कें पानी से धोई गईं, जहां से राष्ट्रपति को गुजरना ही नहीं था।

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