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Shimla News: आईजीएमसी से 36 डॉक्टरों को चमियाना शिफ्ट करने की तैयारी
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना शिफ्ट होंगे एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभाग, आईजीएमसी में खड़ी होंगी दिक्कतें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) से एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों के 36 फैकल्टी सदस्यों (डॉक्टरों) और सीनियर रेजिडेंट (एसआर) को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल चमियाना शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। इस प्रस्ताव से आईजीएमसी के साथ कमला नेहरू अस्पताल में भी मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
ऑपरेशन और अन्य जांचों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। मरीजों को ऑपरेशन और जांचों के लिए आईजीएमसी और चमियाना के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
आईजीएमसी के एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों को चमियाना शिफ्ट करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस संबंध में निदेशक, मेडिकल रिसर्च की ओर से वीरवार को पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें विभागों को शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर जानकारी मांगी गई है। इसके बाद आईजीएमसी के प्राचार्य ने प्रस्ताव दोनों विभागों के विभागाध्यक्षों को भेजकर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है। दूसरी ओर, चमियाना में अलग कैडर नहीं होने के बावजूद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि विभागाध्यक्ष इस प्रस्ताव पर लिखित जवाब देंगे। यदि विभागों को शिफ्ट किया जाता है, तो पीजी सीटों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में विभागों को शिफ्ट करने के बजाय रोटेशन प्रणाली को व्यवस्थित और मजबूत करने की मांग की जा रही है, ताकि मरीजों को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
आईजीएमसी के एनेस्थीसिया विभाग में एमडी एनेस्थीसियोलॉजी की 17 सीटें हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नियमों के अनुसार, फैकल्टी और छात्रों का निर्धारित अनुपात बनाए रखना अनिवार्य है। यदि फैकल्टी सदस्यों को चमियाना शिफ्ट किया जाता है, तो पीजी सीटों की मान्यता पर खतरा पैदा हो सकता है। इससे सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी भी रुक सकती है। साथ ही, जिन विद्यार्थियों का शोध कार्य शिक्षकों के मार्गदर्शन में चल रहा है, उनका भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
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आईजीएमसी के 15 प्रमुख ऑपरेशन थियेटर, रोबोटिक सर्जरी, पेन क्लिनिक और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में एनेस्थीसिया विभाग की अहम भूमिका है। ऐसे में फैकल्टी की संख्या कम होने से नियमित और आपातकालीन, दोनों तरह की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
सेमडीकोट ने जताया विरोध
आईजीएमसी से एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों तथा उनकी फैकल्टी को चमियाना शिफ्ट करने के प्रस्ताव का स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (सेमडीकोट) ने विरोध किया है। संघ ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर प्रस्ताव की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन
किया जाएगा। संघ के अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने कहा कि विभागों और फैकल्टी को शिफ्ट करना उचित नहीं है। इससे चिकित्सकों की कमी दूर होने के बजाय आईजीएमसी में पद खाली हो जाएंगे। साथ ही एनएमसी के नियमों के उल्लंघन की आशंका भी है।
कोट
एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों को आईजीएमसी से चमियाना शिफ्ट करने के प्रस्ताव से संबंधित पत्र हाल ही में प्राप्त हुआ है। विभागों के एचओडी से प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया मांगी गई है।
-सीता ठाकुर, प्राचार्य, आईजीएमसी
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) से एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों के 36 फैकल्टी सदस्यों (डॉक्टरों) और सीनियर रेजिडेंट (एसआर) को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल चमियाना शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। इस प्रस्ताव से आईजीएमसी के साथ कमला नेहरू अस्पताल में भी मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
ऑपरेशन और अन्य जांचों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। मरीजों को ऑपरेशन और जांचों के लिए आईजीएमसी और चमियाना के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
आईजीएमसी के एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों को चमियाना शिफ्ट करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस संबंध में निदेशक, मेडिकल रिसर्च की ओर से वीरवार को पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें विभागों को शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर जानकारी मांगी गई है। इसके बाद आईजीएमसी के प्राचार्य ने प्रस्ताव दोनों विभागों के विभागाध्यक्षों को भेजकर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है। दूसरी ओर, चमियाना में अलग कैडर नहीं होने के बावजूद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। बताया जा रहा है कि विभागाध्यक्ष इस प्रस्ताव पर लिखित जवाब देंगे। यदि विभागों को शिफ्ट किया जाता है, तो पीजी सीटों की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। ऐसे में विभागों को शिफ्ट करने के बजाय रोटेशन प्रणाली को व्यवस्थित और मजबूत करने की मांग की जा रही है, ताकि मरीजों को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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आईजीएमसी के एनेस्थीसिया विभाग में एमडी एनेस्थीसियोलॉजी की 17 सीटें हैं। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नियमों के अनुसार, फैकल्टी और छात्रों का निर्धारित अनुपात बनाए रखना अनिवार्य है। यदि फैकल्टी सदस्यों को चमियाना शिफ्ट किया जाता है, तो पीजी सीटों की मान्यता पर खतरा पैदा हो सकता है। इससे सीटों में प्रस्तावित बढ़ोतरी भी रुक सकती है। साथ ही, जिन विद्यार्थियों का शोध कार्य शिक्षकों के मार्गदर्शन में चल रहा है, उनका भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
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आईजीएमसी के 15 प्रमुख ऑपरेशन थियेटर, रोबोटिक सर्जरी, पेन क्लिनिक और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में एनेस्थीसिया विभाग की अहम भूमिका है। ऐसे में फैकल्टी की संख्या कम होने से नियमित और आपातकालीन, दोनों तरह की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
सेमडीकोट ने जताया विरोध
आईजीएमसी से एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों तथा उनकी फैकल्टी को चमियाना शिफ्ट करने के प्रस्ताव का स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (सेमडीकोट) ने विरोध किया है। संघ ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर प्रस्ताव की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन
किया जाएगा। संघ के अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने कहा कि विभागों और फैकल्टी को शिफ्ट करना उचित नहीं है। इससे चिकित्सकों की कमी दूर होने के बजाय आईजीएमसी में पद खाली हो जाएंगे। साथ ही एनएमसी के नियमों के उल्लंघन की आशंका भी है।
कोट
एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी विभागों को आईजीएमसी से चमियाना शिफ्ट करने के प्रस्ताव से संबंधित पत्र हाल ही में प्राप्त हुआ है। विभागों के एचओडी से प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया मांगी गई है।
-सीता ठाकुर, प्राचार्य, आईजीएमसी