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Shimla News: एचपीयू में नैक टीम के होने वाले दौरे की तैयारियां शुरू
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प्रशासनिक इकाइयों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
छात्रों की प्रतिक्रिया को भी शामिल करने की वकालत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के प्रस्तावित मूल्यांकन दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गईं हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागों, केंद्रों और प्रशासनिक इकाइयों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि संस्थान की अकादमिक और प्रशासनिक स्थिति का समग्र आकलन प्रस्तुत किया जा सके। नैक मूल्यांकन के तहत पाठ्यक्रम, शिक्षण-प्रक्रिया, शोध गतिविधियां, इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र समर्थन प्रणाली और गवर्नेंस जैसे विभिन्न मानकों पर विश्वविद्यालय का मूल्यांकन किया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभागों से पांच वर्षों का रिकॉर्ड मांगा गया है, जिसमें शोध प्रकाशन, सेमिनार, प्लेसमेंट और रिजल्ट डेटा शामिल है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि टीम जल्द विवि का दौरा करेगी जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ आईक्यूएसी को इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय करने की जिम्मेदारी दी है। आईक्यूएसी की ओर से विभागों को डेटा प्रस्तुत करने के लिए समय सीमा भी निर्धारित की है ताकि निर्धारित समय में सेल्फ-स्टडी रिपोर्ट तैयार की जा सके। नैक मूल्यांकन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह विश्वविद्यालय की गुणवत्ता सुधारने का अवसर भी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक सुधारों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए जैसे स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और शोध सुविधाओं को मजबूत करना। छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सीधे तौर पर अकादमिक वातावरण से जुड़े होते हैं। इनका मानना है कि फीडबैक सिस्टम को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि इस बार विश्वविद्यालय बेहतर ग्रेड हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नैक ग्रेडिंग से न केवल संस्थान की साख प्रभावित होती है बल्कि फंडिंग और नई योजनाओं पर भी इसका असर पड़ता है।
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छात्रों की प्रतिक्रिया को भी शामिल करने की वकालत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के प्रस्तावित मूल्यांकन दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गईं हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागों, केंद्रों और प्रशासनिक इकाइयों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि संस्थान की अकादमिक और प्रशासनिक स्थिति का समग्र आकलन प्रस्तुत किया जा सके। नैक मूल्यांकन के तहत पाठ्यक्रम, शिक्षण-प्रक्रिया, शोध गतिविधियां, इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र समर्थन प्रणाली और गवर्नेंस जैसे विभिन्न मानकों पर विश्वविद्यालय का मूल्यांकन किया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभागों से पांच वर्षों का रिकॉर्ड मांगा गया है, जिसमें शोध प्रकाशन, सेमिनार, प्लेसमेंट और रिजल्ट डेटा शामिल है। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि टीम जल्द विवि का दौरा करेगी जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ आईक्यूएसी को इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय करने की जिम्मेदारी दी है। आईक्यूएसी की ओर से विभागों को डेटा प्रस्तुत करने के लिए समय सीमा भी निर्धारित की है ताकि निर्धारित समय में सेल्फ-स्टडी रिपोर्ट तैयार की जा सके। नैक मूल्यांकन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह विश्वविद्यालय की गुणवत्ता सुधारने का अवसर भी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित न रहकर वास्तविक सुधारों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए जैसे स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और शोध सुविधाओं को मजबूत करना। छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनकी प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सीधे तौर पर अकादमिक वातावरण से जुड़े होते हैं। इनका मानना है कि फीडबैक सिस्टम को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि इस बार विश्वविद्यालय बेहतर ग्रेड हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नैक ग्रेडिंग से न केवल संस्थान की साख प्रभावित होती है बल्कि फंडिंग और नई योजनाओं पर भी इसका असर पड़ता है।
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