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हिमाचल: मेडिकल ऑफिसर भर्ती मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्देश, जानें पूरा मामला

Thu, 03 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 05:00 AM IST
सार

मेडिकल अफसरों (एमओ) की नियुक्ति से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को एक महीने के भीतर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उचित आवेदन याचिका दायर करने का सख्त निर्देश दिया है।

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Himachal State govt directed to approach Supreme Court in Medical Officer recruitment case; know the full deta
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध के आधार पर मेडिकल अफसरों (एमओ) की नियुक्ति से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को एक महीने के भीतर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उचित आवेदन याचिका दायर करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार को भली-भांति ज्ञात था कि हाईकोर्ट में कई अन्य पात्र डॉक्टरों की याचिकाएं लंबित हैं। जब राज्य सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी, तब राज्य को सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में यह बात लानी चाहिए थी। अदालत ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन याचिका दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता डॉक्टरों को भी यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे राहत पाने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

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अदालत ने कहा कि राज्य सरकार का यह कर्तव्य था कि वह सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट में लंबित इन समान मामलों की जानकारी दे। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट का आदेश सभी अदालतों पर बाध्यकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2026 में अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि राहत केवल उन्हीं उम्मीदवारों तक सीमित रहेगी जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पक्षकार थे। यदि हाईकोर्ट सीधे इन याचिकाओं पर नियुक्ति का आदेश देता है, तो यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता मूकदर्शक नहीं थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उनकी याचिकाएं लंबित थीं। ऐसे में उनकी याचिकाओं को सीधे खारिज कर देना उनके साथ अन्याय होगा।

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यह मामला नवंबर 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल ऑफिसर के 81 पदों के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू की सूचना जारी की थी। 7 दिसंबर 2021 को हुए इंटरव्यू के बाद 76 पात्र उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार की गई।1 फरवरी 2022 को सरकार ने 76 में से केवल 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए और शेष 33 पात्र उम्मीदवारों को बाहर कर दिया, जबकि बाद के महीनों में सरकार ने सैकड़ों नए पदों के लिए विज्ञापन निकाल दिए। डॉ. ऐश्वर्या ठाकुर व अन्य की याचिका पर 17 नवंबर 2022 को डिवीजन बेंच ने सरकार के फैसले को मनमाना माना और शेष पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने का आदेश दिया। राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2026 के अपने फैसले में माना कि सरकार का निर्णय गलत था, लेकिन राहत का दायरा सीमित कर दिया और कहा कि इसका लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील में पक्षकार बने थे।
 

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