तैयारी: हिमाचल के अफसर अब आरबीआई से सीखेंगे वित्तीय प्रबंधन, पुणे में होगी कार्यशाला
प्रदेश की वित्तीय स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, ऐसे में सरकारी तंत्र को अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम 15 और 16 दिसंबर को पुणे स्थित आरबीआई प्रशिक्षण केंद्र में होने वाली दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लेगी।
विस्तार
आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के दबाव के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार अब वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से विशेषज्ञ प्रशिक्षण लेगी। प्रदेश की वित्तीय स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, ऐसे में सरकारी तंत्र को अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम 15 और 16 दिसंबर को पुणे स्थित आरबीआई प्रशिक्षण केंद्र में होने वाली दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लेगी।
हिमाचल से इस कार्यशाला में जाने वाली टीम का नेतृत्व वित्त सचिव अभिषेक जैन करेंगे। यह कार्यशाला विशेष तौर पर उन राज्यों के लिए आयोजित की जा रही है जो वित्तीय अनुशासन, ऋण प्रबंधन और अनुशासन, राजस्व बढ़ोतरी की दिशा में सुधारात्मक कदम उठाना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों को आरबीआई के विशेषज्ञ वित्तीय मॉडल, कैश फ्लो मैनेजमेंट, व्यय नियंत्रण, पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) और ऋण पुनर्गठन जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण देंगे। इसके साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीसीएस) के तहत होने वाली फंडिंग और इन योजनाओं की निगरानी तंत्र को भी बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।
हिमाचल प्रदेश पर बढ़ते ऋण, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों का भारी बोझ और केंद्र से समय पर नहीं मिलने वाली किस्तें वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में आरबीआई की यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि प्रशिक्षण के बाद वित्तीय निर्णय और बजट प्रबंधन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेंगे।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी होगी बैठक
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड की समीक्षा और समन्वयन पर भी एक अहम बैठक निर्धारित की गई है। वित्त सचिव अभिषेक जैन की अध्यक्षता में यह बैठक 18 दिसंबर को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सचिव वित्त के कक्ष में आयोजित होगी। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में केंद्र से फंड में देरी, योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट, लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र और राज्य की तत्काल वित्तीय आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। सरकार का तर्क है कि यदि केंद्र से समय पर फंड मिले और वित्तीय प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया जाए तो राज्य की आर्थिक चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।