धूमल बोले, झूठे वायदे करना कांग्रेस की आदत, दिहाड़ी बढ़ाई न सड़कें बनाई
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नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि विधानसभा चुनाव के चलते सरकार घोषणाएं और झूठे वायदे कर रही है। पिछले चार वर्ष में सरकार हिमाचल के लिए कुछ नहीं कर पाई। अब अंतिम समय में झूठी घोषणा कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
वायदे करके मुकर जाना कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है। वर्ष 2003 के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने घोषणा की थी कि हर घर से एक व्यक्ति को रोजगार दिया जाएगा। इस वायदे से कांग्रेस ने सत्ता सुख भोगा, लेकिन हर घर से एक व्यक्ति को रोजगार देना तो दूर इस अवधि में मात्र 3386 लोगों को रोजगार दिया गया।
युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वायदा किया था, इसका क्या हुआ यह सारा प्रदेश जानता है। सरकार कितने भी दावे कर ले, लेकिन सच यह है कि बीते चार वर्षों में अपने घोषणा पत्र में किए 90 प्रतिशत कार्यों को पूरा नहीं कर पाई है। मनरेगा में दिहाड़ीदार आज भी 170 रुपये ले रहे हैं, जबकि दिहाड़ी करने का वायदा 200 रुपये किया था।
पांच साल में 7500 किमी नई सड़क बनाने का वायदा किया था, मात्र 1500 किमी नई सड़कें ही बन पाई हैं। 4-9-14 के लिए कर्मचारी तरस रहे हैं। मंडी और धर्मशाला में ट्रिब्यूनल की स्थायी बेंच अभी तक नहीं खोली गई। कहा कि चिटों पर भर्तियों का दौर जारी है। यही वजह है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों में साक्षात्कार प्रक्रिया को खत्म नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार की योजना को अपना बताकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
चुनावी वर्ष में शोशा छोड़ रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र : सत्ती
ऊना में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि वीरभद्र सिंह बताएं कि छह बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी का दर्जा क्यों नहीं दिया गया? अब चुनावी वर्ष में क्यों शोशा छोड़ रहे हैं। वीरवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि सीएम शायद भूल गए हैं कि भाजपा सरकार के समय पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी के रूप में सम्मान दिया गया था।
दो माह से अधिक समय तक सरकार धर्मशाला से चलती थी। इसीलिए धर्मशाला में सचिवालय बनाया गया था। वीरभद्र सिंह ने जिला कांगड़ा से भेदभाव पूर्ण नीति अपनाते हुए इसे सफेद हाथी बनाया है। अब जनता हिमाचल को कांग्रेस मुक्त बनाने जा रही है, ऐसे में सीएम हताशा और बौखलाहट में झूठी घोषणाएं और वायदे कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
कहा कि कांग्रेस ने पहले प्रदेश में हर घर से एक को रोजगार देने का वायदा किया। उसके बाद बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा की। दोनों वायदों को घोषणा पत्र में स्थान देकर सरकारी दस्तावेज बनाने के बावजूद वीरभद्र सिंह मुकरे हैं। वीरभद्र सिंह बताएं कि क्यों घोषणा पत्र को स्वीकार नहीं कर रहे? कांग्रेस पार्टी और सरकार अंतर्विरोध से जूझ रही है।