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Shimla News: फीटल अल्ट्रासाउंड न होने से गर्भवती महिलाओं को जाना पड़ रहा चमियाना

Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
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Pregnant women are having to travel to Chamiyana due to the unavailability of fetal ultrasound services.
केएनएच में कार्डियोलॉजी चिकित्सक न होने से आ रही दिक्कत, आईजीएमसी में भी नहीं है यह सुविधा
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शिशु के दिल की अल्ट्रासाउंड से की जाती है जांच
पूरा दिन चमियाना अस्पताल में खाने पड़ रहे धक्के
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के एकमात्र मातृ एवं शिशु अस्पताल कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में गर्भवती महिलाओं के फीटल इको अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। केएनएच में कार्डियोलॉजी चिकित्सक न होने से भी परेशानी आ रही है, वहीं आईजीएमसी में भी यह सुविधा नहीं है। अल्ट्रासाउंड के बाद कार्डियोलॉजी चिकित्सक की सलाह लेनी पड़ती है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें अपनी बारी के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार आधे दिन बाद महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए तिथि दे दी जाती है। ऐसे में बिना अल्ट्रासाउंड करवाए ही महिलाओं को वापस लौटना पड़ता है। अस्पताल की ओर से दी गई तिथि पर यदि महिला दोपहर 12 बजे के बाद चमियाना अस्पताल पहुंचती हैं तो उसे फिर से अगली तिथि दे दी जाती है। इससे महिलाओं को बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।

वहीं, जिन महिलाओं का अल्ट्रासाउंड हो जाता है, उनका पूरा दिन अस्पताल में ही बीत जाता है। इससे दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड ही नहीं, गर्भवती महिलाओं को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आने-जाने में भी दिक्कत हो रही है। अधिक मरीजों की आवाजाही के कारण गर्भवती महिलाओं को ट्रैवलर भी अक्सर भरी हुई मिलती हैं। चिकित्सकों के अनुसार गर्भधारण के बाद महिलाओं को चार बार फीटल इको अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है। पहला अल्ट्रासाउंड 6 से 9 सप्ताह, दूसरा एनटी स्कैन 11 से 14 सप्ताह, तीसरा एनोमली-टार्गेटेड स्कैन 18 से 22 सप्ताह और चौथा ग्रोथ स्कैन 28 से 32 सप्ताह के बीच किया जाता है।
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कई बार फॉर्म लेने भी आना पड़ता है केएनएच
फीटल इको टेस्ट केएनएच से मिले फॉर्म के बिना नहीं हो पाता है। कई बार गर्भवती महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं होती और वे केवल ओपीडी पर्ची पर लिखे टेस्ट को करवाने के लिए चमियाना अस्पताल चली जाती हैं। वहां उन्हें फॉर्म लाने के लिए कहा जाता है। इसके बाद महिलाओं को दोबारा फॉर्म लेने के लिए केएनएच आना पड़ता है।
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कोट



फीटल इको टेस्ट में कार्डियोलॉजी चिकित्सक की सलाह लेनी पड़ती है। गर्भवती महिलाओं को टेस्ट के लिए फॉर्म भरकर चमियाना अस्पताल भेजा जाता है।



— डॉ. एसएस नेगी, चिकित्सा अधीक्षक, केएनएच शिमला
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