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मंदिरों में प्रसाद बनाने से पहले लेना होगा अब भोग प्रमाण पत्र
Sun, 08 Sep 2019 12:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर
उमेश कुमार शर्मा, अमर उजाला, हमीरपुर
उमेश कुमार शर्मा, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 08 Sep 2019 12:49 PM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
मंदिरों में प्रसाद बनाने के लिए अब मंदिर कमेटियों, संचालकों को भोग प्रमाण पत्र लेना होगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के सौजन्य से मंदिर में प्रसाद इत्यादि बनाने वाले कारीगरों या कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रसाद बनाने के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा।
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प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जो प्रसाद कर्मचारियों की ओर से बनाया जाएगा। इसी आधार पर विभाग कर्मचारियों को भोग प्रमाण पत्र देगा। विभाग ने बीते वर्ष से ही इस प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया है, लेकिन अभी भी बहुत कम स्थानों पर इसका पालन किया जा रहा है।
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प्रसाद को शुद्ध और स्वच्छ बनाने के लिए विभाग मंदिर कर्मचारियों और कारीगरों को ट्रेनिंग देगा। इस विशेष ट्रेनिंग के बाद उन्हें प्रसाद बनाने के लाइसेंस और फिर भोग प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। विभाग ने हमीरपुर के चार मंदिरों को इसमें शामिल किया है।
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दो मंदिरों साईं मंदिर डिडवीं और अवाहदेवी माता मंदिर में प्रमाण पत्र बना लिया गया है। दो बड़े मंदिरों सहित अन्य छोटे मंदिरों में इसका पालन नहीं किया गया है। असिस्टेंट कमिश्नर फूड एंड सेफ्टी अरूण चौहान का कहना है कि मंदिरों में प्रसाद बनाने के लिए भोग सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इससे प्रसाद की गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता निर्धारित होगी।