निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ही पीपीई किट घोटाले की जांच बंद
पीपीई किट की जगह रेन कोट सप्लाई करने के मामले की जांच विजिलेंस विभाग ने बंद कर दी है। विभाग के अधिकारी जांच बंद करने का कारण नहीं बता पा रहे हैं। कोरोना काल में हुए इस घोटाले की जांच सरकार ने विजिलेंस को सौंपी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि अब ऐसी क्या परिस्थितियां बन गईं कि डेढ़ माह से इसकी फाइल बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ही बंद कर दी गई? कोरोना काल में बहुचर्चित पीपीई किट घोटाले की विजिलेंस ने करीब पांच माह तक जांच की। अचानक इसकी फाइल बंद करने से सरकार के भ्रष्टाचार से निपटने के दावों की पोल खुल गई है। पहले इसकी जांच विभागीय स्तर पर भी चल रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विजिलेंस को सौंपा गया था। विजिलेंस विभाग भी इसकी जांच पूरी भी नहीं कर पाया था कि अचानक से फाइल बंद हो गई। मामले से जुड़े अहम अधिकारियों के बयान विभाग ने दर्ज कर लिए हैं। कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज करना बाकी थे। संवाद
यह था मामला
लॉकडाउन के दौरान कोविड केंद्रों में ड्यूटी पर चिकित्सकों तक जब पीपीई किट पहुंचीं तो पता चला कि पीपीई किट की जगह रेन कोट आए हैं। चिकित्सकों ने इन्हें पहनने से इनकार कर दिया था। बीएमओ मार्कंडेय कोविड केंद्रों के नोडल अधिकारी थे। उन्होंने कहा था कि साफ दिख रहा है कि पीपीई किट के नाम पर रेन कोट स्वास्थ्य कर्मियों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इसके बाद घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
इस मामले की फाइल डेढ़ माह पहले बंद कर दी गई है। इसमें कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज हो गए थे। कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज होना बाकी था।
- संजय, डीएसपी विजिलेंस, बिलासपुर