सेनापति के रण छोड़ने के एलान से कांग्रेस में भगदड़, मंत्री भी छोड़ने लगे मैदान
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हिमाचल में विधानसभा चुनाव से पहले ही सेनापति के मैदान छोड़ने के एलान से कांग्रेस में भगदड़ मच गई है। सीएम वीरभद्र सिंह की चुनाव न लड़ने की घोषणा से उनके भरोसेमंद मंत्री तक चुनावी रण छोड़ने की चेतावनी देने लगे हैं तो कई कांग्रेस नेता दिल्ली का रुख करने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि वीरभद्र और उनके समर्थकों ने ये दांव ‘फ्री हैंड’ नहीं मिलने पर चला है।
अब माना जा रहा है कि 29 अगस्त के बाद दिल्ली जाकर वीरभद्र खेमा कांग्रेस आलाकमान से मिलकर भी अपनी बात साफ-साफ कहेगा। वीरभद्र सिंह ने दो दिन पहले विधायक दल की बैठक में दो टूक कह दिया था कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
रविवार को मुख्यमंत्री के करीबी आबकारी मंत्री प्रकाश चौधरी ने भी घोषणा कर दी है कि अगर सीएम चुनाव नहीं लड़ते तो वे भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कई मंत्रियों और विधायकों के भी ऐसा ही स्टैंड लेने के संकेत दिए हैं।
इससे साफ है कि वीरभद्र खेमे ने हाईकमान से ‘फ्री हैंड’ लेने को ये नया दांव चला है। वर्ष 2012 के चुनाव में भी तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर से अनबन के चलते वीरभद्र सिंह और उनके समर्थकों ने हाईकमान को ‘फ्री हैंड’ देने को दबाव बनाया था।
पार्टी अध्यक्ष पद से कौल सिंह ठाकुर को हटवाकर ही वीरभद्र खेमे ने दम लिया था। इस बार भी वीरभद्र के निशाने पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू और उनकी कार्यप्रणाली है। वीरभद्र कांग्रेस प्रचार कमेटी, मेनिफेस्टो कमेटी और अन्य तमाम समितियों को भी अपने अनुसार गठित करवाना चाहते हैं।
टिकट बंटवारे में शत-प्रतिशत दखल चाहते हैं वीरभद्र
सूत्रों ने बताया कि वीरभद्र टिकटों के बंटवारे में इस बार शत-प्रतिशत दखल चाहते हैं। सीएलपी के नेता और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की इसमें भूमिका रहती है। वीरभद्र सीएलपी नेता खुद हैं और सुक्खू पार्टी अध्यक्ष हैं।
वीरभद्र सिंह के हिसाब से सुक्खू शुरू से ही नहीं चल रहे हैं। आशंका है कि सुक्खू टिकटों बंटवारे में विरोधियों के मनमाफिक रोड़ा डाल सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इस बार सीएम बेटे विक्रमादित्य सिंह को भी टिकट चाहते हैं।
पिछली बार उनकी पूर्व सांसद पत्नी का टिकट तक कटवाने में विरोधी सफल हो गए थे। तब चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी में पार्टी अध्यक्ष वीरभद्र सिंह के अलावा दूसरी प्रादेशिक प्रतिनिधि सीएलपी नेता विद्या स्टोक्स थीं। अबकी सीएलपी लीडर ऐसा अध्यक्ष चाहते हैं जो उनकी हां में हां मिलाए।
भाजपा से नहीं, अपनों से लड़ रहे कांग्रेसी
विधानसभा चुनाव से पहले ही सत्तासीन कांग्रेस की हालत बड़ी अजीब हो गई है। कांग्रेसी आपस में ही लड़ रहे हैं, उनके निशाने पर सत्ता में आने को उत्तेजित भाजपा नहीं, बल्कि अपने ही हैं।
शिंदे के प्रभारी बनने के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस के भीतर चल रही फूट खत्म होगी, मगर उन्हीं के सामने वीरभद्र के विरोधी मनमानी पर उतरे हुए हैं। शिंदे चुपचाप सब देख रहे हैं। सीएम वीरभद्र सिंह और उनके समर्थक इसी से नाराज बताए जा रहे हैं।
सुक्खू बोले, कुछ नहीं कहूंगा
प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में मची इस भगदड़ पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कुछ भी कहने से इंकार किया।