पत्र बम पर गर्माई सियासत, जयराम से मिले ये दो मंत्री, धूमल से रवि
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पत्र बम पर बढ़ते विवाद के बीच कांगड़ा के दो मंत्रियों ने गुरुवार को राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात कर आधे घंटे तक बंद कमरे में मंत्रणा की।
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार और उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर की सीएम से मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि अंदर क्या चर्चा हुई, ये बात बाहर नहीं आ पाई। वायरल पत्र में सीएम जयराम ठाकुर के अलावा इन मंत्रियों पर भी कई गंभीर आरोप हैं।
उधर, सूत्रों के अनुसार वायरल पत्र मामले में पुलिस पूछताछ में शामिल हो चुके पूर्व मंत्री रविंद्र रवि ने इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से हमीरपुर में मुलाकात की है। रविंद्र रवि को धूमल का करीबी माना जाता है। शांता कुमार को लिखे इस पत्र ने प्रदेश भाजपा के भीतर भूचाल ला दिया है।
पत्र में लगे हैं गंभीर आरोप
इस पत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार, उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर आदि के बारे में कई आरोप लगाए गए हैं। किसी अज्ञात व्यक्ति ने यह पत्र लिखा है।
इस मामले में पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि के मोबाइल फोन को पुलिस ने जब्त किया है और पुलिस सूत्रों के अनुसार वह कह चुके हैं कि उन्होंने किसी के भेजे पत्र को ही आगे फारवर्ड किया है। इस घटनाक्रम के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री से हुई पूर्व मंत्रियों की मुलाकात को भी पत्र बम कांड से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, परमार ने इस मुलाकात को सामान्य बताया। वहीं ऊना जिले के हरोली पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरवार को पत्रकारों के सवाल पर पत्र बम को लेकर कांगड़ा में मचे घमासान पर चुप्पी साध ली और कुछ भी कहने से इंकार किया।
उपचुनाव पर दिखेगा भाजपा के पत्र बम का असर : विक्रमादित्य
रमेश धवाला और पवन राणा के बीच तनातनी खत्म हुई तो अब यह नया विवाद खड़ा हो गया है। ऐसे में प्रदेश भाजपा के कई नेताओं को इस बात की भी चिंता है कि कहीं इसकी आंच धर्मशाला उपचुनाव की तैयारियों पर न आए। कुछ नेता चाहते हैं कि इस बारे में वरिष्ठ भाजपा नेता मिल-बैठकर डैमेज कंट्रोल करें।
भाजपा के पत्र बम पर कांग्रेस ने सियासत शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव और शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि भाजपा के पत्र बम का असर विस उपचुनाव में दिखेगा। आने वाले दिनों में अभी और भी ऐसे पत्र बमों से इंकार नहीं किया जा सकता।
विक्रमादित्य ने कहा कि इस पत्र में लगे आरोपों की जांच होनी चाहिए। यह हास्यास्पद है कि सोशल मीडिया में पत्र वायरल करने वाले की पुलिस जांच तो कर रही है, पर सरकार आरोपित मंत्रियों के खिलाफ लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर खामोश है।