हिमाचल प्रदेश: साइबर ठगी की रकम का रास्ता तलाश रही पुलिस, संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू
केंद्रीय एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है। इसमें ऐसे खाताधारकों को बैंक में बुलाकर उनकी दोबारा से केवाईसी की जाएगी।
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साइबर धोखाधड़ी के मामलों में ठगी की रकम का रास्ता तलाश करने के लिए साइबर क्राइम सेल ने प्रदेश में बैंक खातों का सत्यापन शुरू कर दिया है। केंद्रीय एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है। इसमें ऐसे खाताधारकों को बैंक में बुलाकर उनकी दोबारा से केवाईसी की जाएगी। साइबर क्राइम सेल ने स्पष्ट किया है कि कोई म्यूल खाता पाए जाने पर खाताधारक के खिलाफ एफआईआर होगी और उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह कार्रवाई भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आईफोरसी) से संदिग्ध खातों की मिली सूचना के आधार पर की जा रही है। सत्यापन के दौरान खाताधारकों की पहचान और केवाईसी विवरण के साथ ही खाते हुए लेनदेन की रकम भी जांच के दायरे में आएगी। जांच के बाद म्यूल और संदिग्ध लेनदेन में संलिप्त बैंक खातों को फ्रीज किया जाएगा। पुलिस यह भी देखेगी कि संदिग्ध लेनदेन किन खातों से जुड़े हैं और रकम का आगे किस तरह ट्रांसफर हुई है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि अगर उनके बैंक खातों में किसी तरह का संदिग्ध लेनदेन होता है तो इसकी जानकारी संबंधित बैंक समेत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दे सकते हैं।
संदिग्ध खातों में लेनदेन का होता है अलग पैटर्न
साइबर क्राइम सेल के अधिकारियों के अनुसार म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध बैंक खातों में लेनदेन का एक विशेष पैटर्न होता है। इसमें नियमित लेनदेन की जगह बड़ी-बड़ी रकम अचानक जमा होती है और फिर या तो अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाती है या फिर उसकी निकासी कर ली जाती है। अब पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह संदिग्ध बैंक खाते म्यूल अकाउंट हैं यानि जिनका अस्पताल साइबर ठग लोगों को गुमराह करके करते हैं या फिर कमिशन के लालच में फंसकर लोगों अपने बैंक खातों को साइबर ठगी में इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं। ऐसे मामलों में अनजान लोग भी हो सकते हैं जिनके बैंक खातों का उनकी सहमति के बिना ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें केवाईसी, मोबाइल सिम का दुरुपयोग करके संचालित होने वाले खाते भी शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश में बीते तीन साल के दौरान साइबर ठगी के 585 मामले दर्ज हुए हैं। इसमें एक अरब 50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 258 आरोपी गिरफ्तार किए हैं और 10.25 करोड़ रुपये की बरामदगी की है। डिजिटल फ्राॅड के सबसे अधिक 59 मामले जिला कांगड़ा में दर्ज हुए। तीन साइबर क्राइम पुलिस थानों में ही डिजिटल फ्रॉड के 262 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें साइबर क्राइम पुलिस थाना मंडी में 100, धर्मशाला और शिमला में 81-81 मामले दर्ज किए गए हैं। ठगी की रकम के मामले में साइबर पुलिस स्टेशन शिमला के अंतर्गत सबसे ज्यादा 55 करोड़ 62 लाख 12 हजार 20 रुपये की ठगी दर्ज की गई है।