एचपी: भूस्खलन से पहले अलर्ट देगा आईआईटी मंडी का एआई मॉडल, ऐसे करेगा काम
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक्स-सेल नाम का एआई आधारित मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल सेंसरों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर मिट्टी के खिसकने का अनुमान लगाता है।
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पहाड़ों में भूस्खलन से पहले ढलान की मिट्टी में हलचल शुरू हो जाती है। इसी हलचल को समय रहते समझने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक्स-सेल नाम का एआई आधारित मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल सेंसरों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर मिट्टी के खिसकने का अनुमान लगाता है। शोध में तीन अलग-अलग प्रयोगों से मिले आंकड़ों पर एक्स-सेल का औसत आरएमएसई 0.2714 रहा। शोध टीम में शुभम कुमार और कला वेंकटा उदय स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग से जुड़े हैं। वहीं मिरोथाली चंद और वरुण दत्त स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
शोध बीते 21 अगस्त को स्प्रिंगर नेचर के अंतरराष्ट्रीय जर्नल जियोएनवायरनमेंटल डिजास्टर्स में प्रकाशित हुआ है। शोध के लिए आईआईटी मंडी परिसर के पास कमांद घाटी क्षेत्र की मिट्टी ली गई। प्रयोगशाला में लकड़ी का एक विशेष फ्लूम टेस्ट बेड तैयार किया गया। इसमें मिट्टी की ढलान बनाकर उसके ऊपरी हिस्से में स्प्रिंकलर लगाया गया। इसके जरिये बारिश का पानी जमीन में जाने और मिट्टी के संतृप्त होने जैसी स्थिति बनाई गई। पानी का रिसाव बढ़ने पर मिट्टी खिसकने लगी और सेंसरों ने उसकी हरकत को रिकॉर्ड किया। मिट्टी की हलचल को पकड़ने के लिए एमपीयू-6050 आईएमयू सेंसर और एक्सटेंसोमीटर लगाए गए।
ऐसे काम करता है आईएमयू सेंसर
आईएमयू सेंसर तीन दिशाओं में होने वाले त्वरण और घूमने की गति से जुड़ा आंकड़ा रिकॉर्ड करता रहा, जबकि एक्सटेंसोमीटर से मिट्टी के वास्तविक विस्थापन का आंकड़ा लिया गया। आंकड़ों को एआई मॉडल में डालकर मिट्टी के खिसकने की मात्रा का अनुमान लगाया गया। एक्स-सेल में लिनियर रिग्रेशन, डिसीजन ट्री, रैंडम फॉरेस्ट, ग्रेडिएंट बूस्टिंग, सपोर्ट वेक्टर रिग्रेशन, के-नियरेस्ट नेबर और एक्सजीबूस्ट जैसे मशीन लर्निंग मॉडलों का इस्तेमाल किया गया। इन मॉडलों से मिले अनुमानों को एक्सजीबूस्ट आधारित मेटा-लर्नर ने एक साथ मिलाकर अंतिम अनुमान तैयार किया। शोध में मशीन लर्निंग के जरिये सेंसर डेटा से सीधे मिट्टी के विस्थापन का अनुमान लगाने की कोशिश की गई। अध्ययन में एक्स-सेल ने तीनों प्रयोगों को मिलाकर औसत आरएमएसई के आधार पर बेहतर संतुलित प्रदर्शन दिया।
भूस्खलन से पहले ढलान की मिट्टी में होने वाली सूक्ष्म हलचल महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। हमारा प्रयास कम लागत वाले सेंसर और एआई की मदद से इन शुरुआती संकेतों को विस्थापन के रूप में समझना है। प्रयोगशाला के परिणाम उत्साहजनक हैं। -प्रो. केवी उदय, आईआईटी मंडी
एक्स-सेल कई मशीन लर्निंग मॉडलों की क्षमताओं को एक साथ जोड़कर सेंसर डेटा से मिट्टी के विस्थापन का अनुमान लगाता है। इस अध्ययन से यह संभावना सामने आती है कि एआई, कम लागत वाली सेंसर तकनीक के साथ मिलकर भविष्य में अधिक विश्वसनीय और सुलभ भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास में उपयोगी हो सकता है।-प्रो. वरुण दत्त, आईआईटी मंडी