गुड़िया केसः सीबीआई का पीछा छूटते ही पुलिस वालों की जेल में हो रही आवभगत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथू जेल में आईजी, तत्कालीन डीएसपी और अन्य पुलिसवालों की जमकर आवभगत हुई। सूत्रों ने बताया कि देर रात तक कुछ गाड़ियां जेल की दिशा में जाती रहीं। भीतर सामान भी भेजा जाता रहा। सीबीआई के रिमांड से छुटकारा मिलने के बाद पुलिसवालों ने एक तरह से यहां राहत की सांस ली।
उधर सीबीआई को संदेह है कि कहीं गुड़िया मामले से जुड़े इस लॉकअप हत्याकांड के गुनहगारों ने ही पब्लिक की आड़ लेकर ये सबूत न जला दिए हों। सीबीआई को पुलिस ने इससे संबंधित कई सबूत नहीं दिए हैं।
ऐसे सबूतों के थाने में जल जाने की बात की जा रही है। इनमें एफटीए कार्ड (जिस पर नमूने लिए जाते हैं) भी थे। इन कार्डों पर थाने के भीतर जहां सूरज को मारा गया था, वहां से उठाए गए खून और अन्य नमूनों को रखा गया था। ये थाने के मालखाने में रखे गए थे, जिनकी फोरेंसिक जांच होनी थी। एफटीए कार्ड पर नमूनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
पब्लिक को गुड़िया मामले की ठीक से जांच नहीं करने और लॉकअप में सूरज हत्याकांड को अंजाम देने का गुस्सा था, इसलिए गुस्से में भड़की पब्लिक ने थाने में आग लगा दी। थाने में लगी आग ने न केवल कई दूसरे मामलों का रिकॉर्ड जला डाला, बल्कि लॉकअप हत्याकांड के उन सबूतों को भी फूंक डाला, जिन्हें पुलिस ने मौके से एकत्र किया था।
पुलिस की रिपोर्ट में एफटीए कार्ड जलाने का जिक्र
सीबीआई को अपनी छानबीन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इन एफटीए कार्ड की जरूरत थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में इन एफटीए कार्ड के जल जाने का भी जिक्र किया है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई को ये भी शक है कि इन नमूनों को भी ठीक से न उठाया गया हो और इनमें भी फर्जीवाड़ा हुआ हो।
फिर भी सीबीआई के लिए ये कार्ड पुलिसवालों को लॉकअप हत्याकांड में ठीक से लपेटने के लिए भी सबूत बन सकते थे। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई को यह भी संदेह है कि पुलिस ने एफटीए कार्ड के जल जाने की बात में भी कहीं आधा सच ही न बताया हो। ऐसे में इन कार्डों की बरामदगी के लिए सीबीआई पुलिसवालों को रिमांड पर लेना चाह रही थी।