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Shimla News: अपनों से बिछड़ने का दर्द बयां कर गया पलायन, कश्मीरी पंडितों की पीड़ा देख नम हुईं आंखें
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गेयटी थिएटर में चतुर्थ पद्मश्री कलाऋषि बाबा योगेंद्र बहुभाषीय नाट्य महोत्सव का आगाज
22 तक रोजाना अलग-अलग नाटकों का होगा मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कश्मीरी पंडितों के पलायन, अत्याचारों और अपनी ही जन्मभूमि से बिछड़ने की पीड़ा को नाटक पलायन ने मंच पर जीवंत कर दिया। रविवार को गेयटी थियेटर में चतुर्थ पद्मश्री कलाऋषि बाबा योगेंद्र बहुभाषीय नाट्य महोत्सव के पहले दिन इस नाटक का मंचन किया गया।
प्रस्तुति में घर-आंगन, पुश्तैनी संपत्ति, मंदिरों, पड़ोस और बचपन की यादों को पीछे छोड़ने की विवशता को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। कलाकारों के अभिनय ने विस्थापन के उस दर्द को सामने रखा जो पीढ़ियों तक लोगों के मन में जीवित रहता है। नाटक ने दर्शकों को उस त्रासदी से रूबरू कराया जिसमें भय, असुरक्षा और अत्याचारों के चलते लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजीव मिश्र की ओर से लिखित इस नाटक का निर्देशन रोहित त्रिपाठी ने किया। दिल्ली के अपस्टेज आर्ट ग्रुप की ओर से प्रस्तुत नाटक में कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से विस्थापन के दर्द और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। इस दौरान मंच पर रोहित त्रिपाठी, सौरभ त्रिपाठी, आयुषी त्रिपाठी और अविनाश सिंह तोमर ने अभिनय किया।
नाटक की प्रकाश परिकल्पना मुकेश झा ने की, जबकि निर्भय कर्तव्य के संगीत ने प्रस्तुति के भावनात्मक पक्ष को और सशक्त बनाया। महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को निर्मल वर्मा के लिखे नाटक डेढ़ इंच ऊपर का मंचन किया जाएगा। इसका निर्देशन कुलदीप वशिष्ठ ने किया है। नाटक की प्रस्तुति दिल्ली की आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दी जाएगी।
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22 तक रोजाना अलग-अलग नाटकों का होगा मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कश्मीरी पंडितों के पलायन, अत्याचारों और अपनी ही जन्मभूमि से बिछड़ने की पीड़ा को नाटक पलायन ने मंच पर जीवंत कर दिया। रविवार को गेयटी थियेटर में चतुर्थ पद्मश्री कलाऋषि बाबा योगेंद्र बहुभाषीय नाट्य महोत्सव के पहले दिन इस नाटक का मंचन किया गया।
प्रस्तुति में घर-आंगन, पुश्तैनी संपत्ति, मंदिरों, पड़ोस और बचपन की यादों को पीछे छोड़ने की विवशता को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। कलाकारों के अभिनय ने विस्थापन के उस दर्द को सामने रखा जो पीढ़ियों तक लोगों के मन में जीवित रहता है। नाटक ने दर्शकों को उस त्रासदी से रूबरू कराया जिसमें भय, असुरक्षा और अत्याचारों के चलते लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजीव मिश्र की ओर से लिखित इस नाटक का निर्देशन रोहित त्रिपाठी ने किया। दिल्ली के अपस्टेज आर्ट ग्रुप की ओर से प्रस्तुत नाटक में कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से विस्थापन के दर्द और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। इस दौरान मंच पर रोहित त्रिपाठी, सौरभ त्रिपाठी, आयुषी त्रिपाठी और अविनाश सिंह तोमर ने अभिनय किया।
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नाटक की प्रकाश परिकल्पना मुकेश झा ने की, जबकि निर्भय कर्तव्य के संगीत ने प्रस्तुति के भावनात्मक पक्ष को और सशक्त बनाया। महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को निर्मल वर्मा के लिखे नाटक डेढ़ इंच ऊपर का मंचन किया जाएगा। इसका निर्देशन कुलदीप वशिष्ठ ने किया है। नाटक की प्रस्तुति दिल्ली की आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन की ओर से दी जाएगी।
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