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Shimla News: शराब के नशे में वाहन चलाने पर मुआवजे की याचिका की खारिज
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जुब्बल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था वाहन
वाहन दुर्घटना में चालक की हो गई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज करने के निर्णय को सही ठहराया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि दुर्घटना के समय वाहन चालक नशे की हालत में पाया जाता है, तो यह बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा और कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं है।
मैसर्स शर्मा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के प्रोपराइटर अजय कुमार शर्मा ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता का वाहन 27 सितंबर 2022 को जुब्बल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें चालक दीपक की मौत हो गई थी। वाहन का बीमा कंपनी के पास जीरो डेप्रिसिएशन कवर के साथ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने सभी औपचारिकताओं को पूरा किया लेकिन कंपनी ने गलत तरीके से उसका क्लेम नकार दिया था। आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि जांच रिपोर्ट और एसएफएसएल जुन्गा की रिपोर्ट के अनुसार दुर्घटना के समय चालक के खून में 84.02 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर एथिल अल्कोहल पाया गया था। कंपनी ने दलील दी कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार यदि चालक नशे की हालत में वाहन चलाता है, तो कंपनी क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। इसके अलावा वाहन में तीन अन्य लोग भी सवार थे जो शराब के नशे में थे।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एसएफएसएल रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि चालक शराब के नशे में था। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता अदालतों की कार्यवाही संक्षिप्त होती है और साक्ष्य अधिनियम की सख्त तकनीकी जटिलताओं का पालन करना आवश्यक नहीं है। यदि बीमा कंपनी ने एसएफएसएल की रिपोर्ट पेश की है तो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि चालक नशे में था। इन आधारों पर आयोग ने शिकायतकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया।
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वाहन दुर्घटना में चालक की हो गई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम को खारिज करने के निर्णय को सही ठहराया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि दुर्घटना के समय वाहन चालक नशे की हालत में पाया जाता है, तो यह बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा और कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं है।
मैसर्स शर्मा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के प्रोपराइटर अजय कुमार शर्मा ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता का वाहन 27 सितंबर 2022 को जुब्बल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें चालक दीपक की मौत हो गई थी। वाहन का बीमा कंपनी के पास जीरो डेप्रिसिएशन कवर के साथ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने सभी औपचारिकताओं को पूरा किया लेकिन कंपनी ने गलत तरीके से उसका क्लेम नकार दिया था। आयोग के समक्ष बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि जांच रिपोर्ट और एसएफएसएल जुन्गा की रिपोर्ट के अनुसार दुर्घटना के समय चालक के खून में 84.02 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर एथिल अल्कोहल पाया गया था। कंपनी ने दलील दी कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार यदि चालक नशे की हालत में वाहन चलाता है, तो कंपनी क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। इसके अलावा वाहन में तीन अन्य लोग भी सवार थे जो शराब के नशे में थे।
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एसएफएसएल रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि चालक शराब के नशे में था। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता अदालतों की कार्यवाही संक्षिप्त होती है और साक्ष्य अधिनियम की सख्त तकनीकी जटिलताओं का पालन करना आवश्यक नहीं है। यदि बीमा कंपनी ने एसएफएसएल की रिपोर्ट पेश की है तो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि चालक नशे में था। इन आधारों पर आयोग ने शिकायतकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया।
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