यहां कंधों पर अस्पताल पहुंचता है मरीज
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हिमाचल के जिला मंडी के सुकेती खड्ड के किनारे बसे हजारों लोगों की व्यथा देखिए। सुंदरनगर से लेकर डडौर तक खड्ड पर कोई पुल नहीं है। ऐसे में मजबूरन लोगों को उफनती खड्ड पार करना पड़ती है।
अगर व्यक्ति स्वस्थ हो तो कोई बात नहीं, लेकिन मरीजों को भी पलंग पर उठाकर ले जाना पड़ता है। ग्रामीण लंबे समय से मंगलाह-काटली के बीच पुल का निर्माण करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
अगर ग्रामीण खड्ड पार करके जाते हैं तो वे पैदल की 10-15 मिनट में पहुंच जाएंगे। अगर वाहन का सहारा लेते हैं तो उन्हें 8 से 10 किलोमीटर का चक्कर पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण खड्ड पार करने का जोखिम उठाना ही बेहतर समझते हैं।
आधा दर्जन गांव के लोग झेल रहे परेशानी
सुकेती खड्ड के दोनों ओर रहने वाले आधा दर्जन पंचायतों के लोग बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी झेलते हैं। खड्ड में सिल्ट के कारण दलदल हो गया है।
इस कारण खड्ड के आरपार जाने के लिए दोनों तरफ रहने वाले ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करना पड़ रही है। हालत यह है कि बीमारी की अवस्था में मरीज को पलंग पर डालकर दलदल से भरी खड्ड को पार करवाना पड़ता है।
भाजपा किसान मोरचा के जिला अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा ने बताया कि करीब एक दशक में खड्ड पार करते समय सिल्ट में फंसने से दर्जन भर लोगों की मौत हो चुकी है।
ग्रामीण लंबे समय से कर रहे पुल की मांग
ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि बीबीएमबी सुकेती खड्ड पर पुल का निर्माण करवाए। इसे बीबीएमबी ने मंजूरी भी प्रदान कर दी है और इसके लिए डेढ़ करोड़ का बजट मंजूर हो चुका है।
लेकिन लोनिवि अभी तक काम शुरू नहीं कर पाया है। इस कारण लोगों को सौ मीटर के फासले की जगह आठ किलोमीटर का सफर करना पड़ता है।
बीएसएल परियोजना के मुख्य अभियंता एसके शर्मा ने सुकेती खड्ड पर पुल के लिए मंजूरी देने की पुष्टि की है। कहा कि निर्माण कार्य लोनिवि ने करना है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता सुरेश कपूर का कहना है कि बीबीएमबी से जैसे ही बजट मिलेगा पुल का काम शुरू कर दिया जाएगा।