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वक्त पर स्क्रब टायफस की दवा न लेने से मौत के मुंह में जा रहे लोग

Sun, 10 Mar 2019 05:00 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Sun, 10 Mar 2019 05:00 AM IST
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People goining to the mouth of death due to non availability of typhus medicine timely
प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर दवा न खाने से स्क्रब टायफस से मौत होने का प्रमुख कारण है। शोध में यह बात आईजीएमसी शिमला के चिकित्सकों ने सामने लाई है। यह शोध पत्र जर्नल द एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स ऑफ इंडिया के मार्च 2019 के अंक में छपा है।

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यह शोध आईजीएमसी शिमला के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र मोक्टा, पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. आशा रंजन और माइक्रो बायोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. किरण मोक्टा ने किया है। इसके मुताबिक स्क्रब टायफस बुखार हिमालयीय क्षेत्र में ज्वर संबंधी रोग के रूप में प्रमुखता से उभरा है।
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समय पर दवा न मिलने से बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हो रही है। यह अध्ययन कुछ अरसे पहले 18 साल से अधिक आयु के आईजीएमसी में दाखिल मरीजों पर किया गया।

यह अध्ययन कुल 106 मरीजों पर किया गया। इनमें 42 पुरुष और 64 महिलाएं थीं। इनमें 56 शिमला, 8 सोलन, 20 मंडी, 5 कुल्लू, 12 बिलासपुर और पांच अन्य जिलों से थीं। 

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दाखिल मरीजों में से इतने फीसदी मरीजों की मौत

People goining to the mouth of death due to non availability of typhus medicine timely

इनमें से 10 प्रतिशत मरीजों ने ही दाखिले से पहले एंटी स्क्रब एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन खाई थीं। दाखिल मरीजों में से 6.6 प्रतिशत यानी सात रोगियों की मौत हो गई।

इनमें किसी ने भी अस्पताल में पहुंचाए जाने से पहले एंटी एंटी स्क्रब एंटीबायोटिक दवाएं नहीं खाईं। अधिकतर मरीज अस्पताल में स्क्रब टायफस की चपेट में आने के बाद भी देरी से लाए गए। जिन मरीजों को पहले ही एंटी स्क्रब दवाएं दी गईं, उनका बचाव हो गया।

शोध में चिकित्सकों ने पाया कि जब स्क्रब टाइफस का सीजन चला हो तो डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन को प्रारंभिक इंपीरिकल एंटी माइक्रोबियल थेरेपी में शामिल किया जाना चाहिए।

इसका मकसद स्क्रब टायफस से मौतें कम करना है। डॉ. मोक्टा ने कहा कि इस बुखार के सीजन में डॉक्टर को एंटी स्क्रब टायफस दवाइयों को जरूर देना चाहिए। अमेरिका जैसे देशों में भी ऐसे ही मानक हैं। 

आजकल सीजन नहीं, फिर भी दो महीने में 28 को स्क्रब टायफस 

आजकल इस बुखार का सीजन नहीं हैं। फिर भी दो महीनों में 28 लोगों में स्क्रब टायफस पाया गया हैै। स्वास्थ्य निदेशालय के पास एक जनवरी से लेकर छह मार्च 2019 तक के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 624 लोगों ने स्क्रब टायफस के संदेह पर टेस्ट करवाया।

इसके बाद कुल 28 मरीजों में से बिलासपुर में 9, चंबा में 2, हमीरपुर में 5, कांगड़ा में 10, शिमला में 2 और सोलन में 1 मरीज का नमूना पाजिटिव पाया गया। इनमें से छह मार्च को ही तीन मरीज स्क्रब टायफस के पॉजिटिव पाए गए। पिछले साल स्क्रब टायफस के कारण डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई।  

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