डेढ़ लाख पेंशनरों को मायूस कर गई सरकार

ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 16 Oct 2015 10:21 AM IST
pensioners jcc meeting with hp govt.
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प्रदेश सरकार ने चार साल बाद हुई जेसीसी की बैठक में डेढ़ लाख पेंशनरों को मायूस कर दिया। वीरवार को पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन की प्रदेश सरकार के साथ बैठक हुई। इसमें 15 मांगों का एजेंडा तैयार किया गया था। सरकार ने महज तीन मांगों पर सहमति जताई, जबकि 12 मुख्य मांगों पर आलाधिकारी पेंशनरों को टालते रहे।
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हालांकि, जेसीसी में पेंशनरों ने अफसरों पर मांगें मनवाने का दबाव भी बनाया लेकिन अफसरों के आगे इनकी एक नहीं चली। अब निराश पेंशनरों ने आपबीती सुनाने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलने का फैसला लिया है। पेंशनरों की जेसीसी वीरवार को सचिवालय आर्मडेल कांफ्रेंस हाल में हुई। इसमें प्रदेश एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सरकार के आला अधिकारियों के पास 15 मांगों को एजेंडा रखा गया।


सरकार ने पेंशनरों को इलाज के लिए पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली में हिमाचल भवन में सरकारी कर्मचारियों के तर्ज पर कमरे उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा मेडिकल बिलों के भुगतान 3 महीने के भीतर किए जाने और विभागों के एचओडी को पेंशनरों की समस्या सुनने और बिल संबंधित मामले निपटाने का आश्वासन दिया।

ये थीं पेंशनरों की मुख्य मांगें
केंद्र और पंजाब की तर्ज पर निर्धारित चिकित्सा भत्ता 350 से बढ़ाकर 500 किया जाना, पेंशनरों को 65,70, 75 और 80 वर्ष की आयु में पंजाब की तर्ज पर अतिरिक्त पेंशन दिया जाना, 1-1-2006 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन रिवाइज किया जाना, तीर्थ यात्रा के लिए पेंशनरों को एडवांस पेंशन दिया जाना

सरकार के अफसरों का रवैया निराशाजनक
पेंशनर एसोसिएशन के महासचिव हरिचंद गुप्ता ने कहा कि इन मांगों पर सरकार के अफसरों का रवैया निराशाजनक रहा है। हालांकि, जेसीसी (संयुक्त समन्वय समिति) के बीच में अधिकारियों ने यहां तक कह दिया कि जो देना था वह दे दिया है। इस दौरान एसोसिएशन ने अफसरों को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सुंदरनगर पेंशनर एसोसिएशन के सम्मेलन में वित्तीय लाभ देने की घोषणा की थी। इसमें सीएम ने पेंशनरों की हर मांगों को माना है।

मुख्य सचिव बोले, पेंशनरों की समस्या को लेकर गंभीर सरकार
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार पेंशनरों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। चिकित्सा बिलों की अदायगी के लिए 40 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित चिकित्सा बिलों का भुगतान करने के लिए विभिन्न विभागों 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की जाएगी।

मित्रा ने कहा कि जहां तक फिक्सड चिकित्सा भत्ते को खुले चिकित्सा भत्ते के विकल्प में परिवर्तित करने का मामला है, गंभीर बीमारियों में चिकित्सा विशेषज्ञ प्रमाण पत्र के आधार पर व्यक्तिगत मामलों में इस तरह के परिवर्तन के लिए सरकार ने पहले ही वर्ष 1996 में निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि वर्ष 2012 में चिकित्सा भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये किया गया था। बैठक में विभिन्न संगठनों के 76 सेवानिवृत्त पेंशनरों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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