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Shimla News: जिले में नाशपती का कारोबार घटा, दामों में भी आई गिरावट
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बीते वर्ष के मुकाबले 70 हजार कम पहुंचे पेटियां
कम धूप के चलते नाशपाती का उत्पादन हुआ प्रभावित
भारती शर्मा
शिमला। जिले में इस बार नाशपाती की पैदावार कम हुई है जिससे कारोबार में भी गिरावट आई है। फल मंडियों में बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष नाशपाती के 70, 730 पेटियां कम पहुंची हैं।
कारोबार में गिरावट आने से बागवानों को फसल के दाम भी कम मिले हैं। इससे बागवानों पर दोहरी मार पड़ी है। बीते वर्ष जहां नाशपाती की 20 किलो की पेटी 300 से 32,00 रुपये तक बिकी थी वहीं इस वर्ष 20 किलो की पेटी को 300 से 3,000 रुपये तक दाम मिले। बागवानों को कहना है कि इस वर्ष नाशपाती की शुरुआत में अच्छी फसल थी लेकिन फलों को सही मात्रा में धूप न मिलने से छोटे फल झड़ गए और बच्चे फलों का सही आकार न बन पाया। इस वजह से उसे मार्केट में सही दाम नहीं मिल पाए हैं। इससे पूरे साल बगीचों में की मेहनत और स्प्रे का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है।
हर वर्ष जिले में नाशपाती की लाखों पेटियां का उत्पादन होता है। इस वर्ष नाशपाती की पैदावार कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर से मिले आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष 10 सितंबर तक 6 लाख 9 हजार 749 सेब की पेटियां मंडी में पहुंची थीं वहीं इस वर्ष 10 सितंबर तक 5 लाख 39 हजार 019 नाशपाती की पेटियां ही फल मंडियों में पहुंची हैं। भट्ठाकुफर फल मंडी में बीते वर्ष नाशपाती की 1 लाख 40 हजार 686 नाशपाती की पेटियां पहुंची थीं वहीं इस वर्ष अभी तक 88,427 पेटियां ही मंडी में पहुंच पाई हैं। हालांकि अभी सीजन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कुछेक क्षेत्राें से बाबुगोशा नाशपाती आ रही है। आढ़तियों का कहना है कि मुश्किल से ही यह सीजन 6 लाख पेटियों तक पहुंच पाएगा।
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मौसम की मार से फसल ठीक से तैयार नहीं हुई
इस वर्ष मौसम की मार की वजह से नाशपाती की फसल ठीक तरह से तैयार नहीं हो पाई। जब तक फसल तैयार हुई उस दौरान हुई लगातार बारिश ने पुरी फसल तबाह कर दी। इसकी वजह से इस वर्ष पेटियों की संख्या और दामों में गिरावट आई है।
....देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी, शिमला-किन्नौर
किस मंडी में कितनी बिकी नाशपाती
फल मंडी बीते वर्ष इस वर्ष
भट्ठाकुफर 1,40,686 88,427
पराला 2,93,249 3,03,711
नेरवा 7,118 12,755
खड़ा पत्थर 0 2,331
मेंहदली 1,68,696 1,29,139
अणु 0 2656
(नोट - बीते वर्ष के आंकड़े पूरे सीजन के हैं और इस वर्ष के आंकड़े 10 सितंबर तक के हैं)
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कम धूप के चलते नाशपाती का उत्पादन हुआ प्रभावित
भारती शर्मा
शिमला। जिले में इस बार नाशपाती की पैदावार कम हुई है जिससे कारोबार में भी गिरावट आई है। फल मंडियों में बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष नाशपाती के 70, 730 पेटियां कम पहुंची हैं।
कारोबार में गिरावट आने से बागवानों को फसल के दाम भी कम मिले हैं। इससे बागवानों पर दोहरी मार पड़ी है। बीते वर्ष जहां नाशपाती की 20 किलो की पेटी 300 से 32,00 रुपये तक बिकी थी वहीं इस वर्ष 20 किलो की पेटी को 300 से 3,000 रुपये तक दाम मिले। बागवानों को कहना है कि इस वर्ष नाशपाती की शुरुआत में अच्छी फसल थी लेकिन फलों को सही मात्रा में धूप न मिलने से छोटे फल झड़ गए और बच्चे फलों का सही आकार न बन पाया। इस वजह से उसे मार्केट में सही दाम नहीं मिल पाए हैं। इससे पूरे साल बगीचों में की मेहनत और स्प्रे का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है।
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हर वर्ष जिले में नाशपाती की लाखों पेटियां का उत्पादन होता है। इस वर्ष नाशपाती की पैदावार कम है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर से मिले आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष 10 सितंबर तक 6 लाख 9 हजार 749 सेब की पेटियां मंडी में पहुंची थीं वहीं इस वर्ष 10 सितंबर तक 5 लाख 39 हजार 019 नाशपाती की पेटियां ही फल मंडियों में पहुंची हैं। भट्ठाकुफर फल मंडी में बीते वर्ष नाशपाती की 1 लाख 40 हजार 686 नाशपाती की पेटियां पहुंची थीं वहीं इस वर्ष अभी तक 88,427 पेटियां ही मंडी में पहुंच पाई हैं। हालांकि अभी सीजन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कुछेक क्षेत्राें से बाबुगोशा नाशपाती आ रही है। आढ़तियों का कहना है कि मुश्किल से ही यह सीजन 6 लाख पेटियों तक पहुंच पाएगा।
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मौसम की मार से फसल ठीक से तैयार नहीं हुई
इस वर्ष मौसम की मार की वजह से नाशपाती की फसल ठीक तरह से तैयार नहीं हो पाई। जब तक फसल तैयार हुई उस दौरान हुई लगातार बारिश ने पुरी फसल तबाह कर दी। इसकी वजह से इस वर्ष पेटियों की संख्या और दामों में गिरावट आई है।
....देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी, शिमला-किन्नौर
किस मंडी में कितनी बिकी नाशपाती
फल मंडी बीते वर्ष इस वर्ष
भट्ठाकुफर 1,40,686 88,427
पराला 2,93,249 3,03,711
नेरवा 7,118 12,755
खड़ा पत्थर 0 2,331
मेंहदली 1,68,696 1,29,139
अणु 0 2656
(नोट - बीते वर्ष के आंकड़े पूरे सीजन के हैं और इस वर्ष के आंकड़े 10 सितंबर तक के हैं)