फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   pea crop destroyed due to rain in sirmour himachal, prices are also getting less

सिरमौर: बरसात से मटर की फसल तबाह, दाम भी मिल रहे कम

Mon, 01 Nov 2021 11:17 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नौहराधार (सिरमौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, नौहराधार (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Mon, 01 Nov 2021 11:17 AM IST
सार

 किसानों के अनुसार बरसाती मटर की फसल इस बार सितंबर में अत्यधिक बरसात होने के चलते लगभग 80 फीसदी पहले ही खत्म हो चुकी है। इस समय शेष बची 20 फीसदी फसल बाजार में आना शुरू हो चुकी है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विज्ञापन
pea crop destroyed due to rain in sirmour himachal, prices are also getting less
मटर की फसल तबाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ऊपरी क्षेत्र नौहराधार और हरिपुधार में बरसाती मटर की फसल तैयार होकर बाजार में आ चुकी है। इन क्षेत्रों में इस बार पहले की मुकाबले फसल काफी कम है। ऊपर से दाम भी उतने नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार बरसाती मटर की फसल इस बार सितंबर में अत्यधिक बरसात होने के चलते लगभग 80 फीसदी पहले ही खत्म हो चुकी है। इस समय शेष बची 20 फीसदी फसल बाजार में आना शुरू हो चुकी है। क्षेत्र के किसान मोहनलाल, अशोक, संजय, राजेश, सुरेंद्र, कमलराज आदि ने बताया कि उन्होंने मटर का बीज 250 से 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीद कर बिजाई की थी। मटर की पैदावार भी काफी अच्छी हुई थी, लेकिन सितंबर में लगातार बारिश और धुंध ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। उन्होंने बताया कि शेष बची फसल से तो अब बीज भाड़ा भी पूरा नहीं हो रहा है।

विज्ञापन


बता दें कि मटर की यह नगदी फसल वर्ष की अंतिम फसल होती है। इससे किसान आगामी सर्दियों के लिए अपने घर की जरूरत की चीजें खरीदते हैं। इस वर्ष तो किसानों को बीज खाद, गोबर, दवाइयों आदि का खर्चा भी जेब से देना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय उत्पादन कम होने के चलते स्थानीय आढ़ती 90 से 95 रुपये प्रति किलो मटर खरीद रहे हैं। गौरतलब है कि क्षेत्र के नौहराधार, संगड़ाह, अंधेरी, देवामानल, घन्दूरी, भराड़ी, चाढना, चोकर, गताधार, डियूडी खडाह, सैलपाब, देवना थनगा आदि क्षेत्रों में करीब 14 सौ हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने मटर की बिजाई की थी। मात्र 60 दिनों के भीतर यह मटर की फसल तैयार हो जाती है और दिवाली से पहले हरा मटर बाजारों में आ जाता है। लेकिन, इस बार नाम मात्र की पैदावार होने से किसानों का दिवाली पर्व का फीका रहने वाला है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed