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Shimla News: भीड़ में दर्द दबाए बैठे रहे मरीज, ओपीडी में तीन घंटे बाद आई बारी
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों की भीड़, सुबह नौ बजे ओपीडी के बाहर बैठे मरीजों की 12 बजे आई बारी
सुरक्षा कर्मियों पर चहेतों को वरियता देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में सोमवार को मरीजों की कतारें लगी रहीं। अस्पताल में शुक्रवार से छुट्टी होने के कारण सोमवार को अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई।
हालत यह थी कि सुबह नौ बजे ओपीडी के बाहर बैठे मरीजों की 12 बजे बारी आई। यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी में अधिक भीड़ थी। यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी में भीड़ के कारण सुरक्षा कर्मियों से बहसबाजी भी होती रही। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यूरोलॉजी में 255, न्यूरोलॉजी 260 और कार्डियोलॉजी में 240 मरीजों ने चेकअप करवाया। एक मरीज को चेक करने में डॉक्टरों को 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। लोगों ने ओपीडी में सीनियर डाॅक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अभी एक ओपीडी में एक से दो सीनियर डॉक्टर होते हैं। इसके अलावा अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो सीनियर डॉक्टरों को ओपीडी से उठकर भी जाना पड़ता है।
मरीजों ने आरोप लगाया कि कुछ सुरक्षा कर्मी चहेतों को भी वरियता दे रहे थे। मरीजों की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए कर्मी ही उन्हें परेशानी में डाल रहे हैं और मरीजों को घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को अस्पताल में हालात ज्यादा खराब थे। पर्ची से लेकर ओपीडी समेत लैब और ईसीजी कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। मरीजों का आरोप है कि अगर ओपीडी के बाहर सुरक्षा कर्मियों से कोई जानकारी ली जाए तो वह गुस्से में बातचीत करते हैं। इससे मरीजों को जानकारी तक नहीं मिल पाती है। इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को शिकायत भी की जाती है, तो भी कोई हल नहीं निकल पाता। वहीं सुरक्षा कर्मियों के सुपरवाइजर मुकेश ने कहा कि बिना टोकन नंबर के किसी को नहीं जाने दिया जाता।
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मरीज कम, तीमारदार ज्यादा
अस्पताल में ओपीडी के बाहर मरीजों की संख्या कम होती है और तीमारदारों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में ओपीडी के बाहर रखे बेंच पूरी तरह से फुल हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि एक मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार होते हैं, जो बारी आने से पहले ही मरीज के साथ ओपीडी के बाहर बैठ जाते हैं। इससे अन्य मरीजों को काफी दिक्कत आती है। इसी के साथ ओपीडी के बाहर भीड़ भी अधिक हो जाती है।
इनसेट
मां को लाई थीं चेकअप करवाने
मंडी से आई सुषमा ने बताया कि वह अपनी माता को लेकर यूरोलॉजी ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए आई थीं। उन्हें टोकन नंबर सी-6 दिया था। उन्हें ओपीडी के बाहर सुबह नौ बजे बिठाया गया लेकिन उन्हें तीन बार बेंच से उठाकर सुरक्षा कर्मी ने पिछली ओर भेज दिया। कई बार इसी तरह सुरक्षा कर्मी ने किया। ऐसा होने पर जब सुरक्षा कर्मी से पूछा तो वह बहस करने पर उतारू हो गए। इससे काफी दिक्कत आई। कार्डियोलॉजी में भी जांच के लिए आए नवीन ने बताया कि वह ओपीडी के बाहर काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान सुरक्षा कर्मी ने तीन से चार अपने मरीजों की जांच करवाई, जो पूरी तरह गलत है।
कोट...
मरीजों की काफी भीड़ थी। सुरक्षा कर्मियों को मरीजों की सुरक्षा और उन्हें गाइड करने के लिए कहा है। मरीजों को अस्पताल में परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना
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सुरक्षा कर्मियों पर चहेतों को वरियता देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में सोमवार को मरीजों की कतारें लगी रहीं। अस्पताल में शुक्रवार से छुट्टी होने के कारण सोमवार को अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई।
हालत यह थी कि सुबह नौ बजे ओपीडी के बाहर बैठे मरीजों की 12 बजे बारी आई। यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी में अधिक भीड़ थी। यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी में भीड़ के कारण सुरक्षा कर्मियों से बहसबाजी भी होती रही। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यूरोलॉजी में 255, न्यूरोलॉजी 260 और कार्डियोलॉजी में 240 मरीजों ने चेकअप करवाया। एक मरीज को चेक करने में डॉक्टरों को 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। लोगों ने ओपीडी में सीनियर डाॅक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अभी एक ओपीडी में एक से दो सीनियर डॉक्टर होते हैं। इसके अलावा अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो सीनियर डॉक्टरों को ओपीडी से उठकर भी जाना पड़ता है।
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मरीजों ने आरोप लगाया कि कुछ सुरक्षा कर्मी चहेतों को भी वरियता दे रहे थे। मरीजों की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए कर्मी ही उन्हें परेशानी में डाल रहे हैं और मरीजों को घंटों खड़े रहकर इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को अस्पताल में हालात ज्यादा खराब थे। पर्ची से लेकर ओपीडी समेत लैब और ईसीजी कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। मरीजों का आरोप है कि अगर ओपीडी के बाहर सुरक्षा कर्मियों से कोई जानकारी ली जाए तो वह गुस्से में बातचीत करते हैं। इससे मरीजों को जानकारी तक नहीं मिल पाती है। इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को शिकायत भी की जाती है, तो भी कोई हल नहीं निकल पाता। वहीं सुरक्षा कर्मियों के सुपरवाइजर मुकेश ने कहा कि बिना टोकन नंबर के किसी को नहीं जाने दिया जाता।
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मरीज कम, तीमारदार ज्यादा
अस्पताल में ओपीडी के बाहर मरीजों की संख्या कम होती है और तीमारदारों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में ओपीडी के बाहर रखे बेंच पूरी तरह से फुल हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि एक मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार होते हैं, जो बारी आने से पहले ही मरीज के साथ ओपीडी के बाहर बैठ जाते हैं। इससे अन्य मरीजों को काफी दिक्कत आती है। इसी के साथ ओपीडी के बाहर भीड़ भी अधिक हो जाती है।
इनसेट
मां को लाई थीं चेकअप करवाने
मंडी से आई सुषमा ने बताया कि वह अपनी माता को लेकर यूरोलॉजी ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए आई थीं। उन्हें टोकन नंबर सी-6 दिया था। उन्हें ओपीडी के बाहर सुबह नौ बजे बिठाया गया लेकिन उन्हें तीन बार बेंच से उठाकर सुरक्षा कर्मी ने पिछली ओर भेज दिया। कई बार इसी तरह सुरक्षा कर्मी ने किया। ऐसा होने पर जब सुरक्षा कर्मी से पूछा तो वह बहस करने पर उतारू हो गए। इससे काफी दिक्कत आई। कार्डियोलॉजी में भी जांच के लिए आए नवीन ने बताया कि वह ओपीडी के बाहर काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान सुरक्षा कर्मी ने तीन से चार अपने मरीजों की जांच करवाई, जो पूरी तरह गलत है।
कोट...
मरीजों की काफी भीड़ थी। सुरक्षा कर्मियों को मरीजों की सुरक्षा और उन्हें गाइड करने के लिए कहा है। मरीजों को अस्पताल में परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना