बहसते रहे डाक्टर और थम गईं मरीज की सांसें
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आईजीएमसी अस्पताल में दो विभागों की खींचतान में मरीज की ही सांसें थम गईं। इस बार विवादों के घेरे में मेडिसन और सर्जरी महकमा है। ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर एक-दूसरे पर मरीज को थोपते रहे।
परिजन जब डाक्टर के पास जाकर मरीज को एक बार देख लेने का आग्रह कर रहे थे तो डाक्टर उन्हें सर्जरी का केस बता रहे थे। सर्जरी वालों के पास गए तो उन्हें मेडिसन का केस बताकर भेज दिया।
इधर से उधर करते-करते मरीज की किसी ने सुध नहीं ली। अंतत: इलाज के अभाव में मरीज की मौत हो गई। मौत हो जाने के बाद डाक्टर मरीज के पास आया।
मेडिसन और सर्जरी विभाग के बीच पिसकर रह गए परिजन
मामला बिलासपुर के बरठीं इलाके के प्रेम चंद का है। इनके पेट में तकलीफ थी। बेटा सुरेंद्र कुमार इन्हें उपचार के लिए बिलासपुर अस्पताल ले गए। वहां से इन्हें आईजीएमसी रेफर किया गया। यहां परिजन रात दो बजे आपातकालीन वार्ड में पहुंचे। ड्यूटी पर बैठे डाक्टर ने टेस्ट लिखे।
रात को सभी तरह के टेस्ट हुए लेकिन टेस्ट रिपोर्ट देखने के बाद मेडिसन और सर्जरी विभाग के डॉक्टरों में ठन गई। दोनों एक-दूसरे का केस होने की बात कहकर मरीज की जांच करने नहीं आए। परिजनों ने काफी आग्रह किया लेकिन कोई नहीं पिघला।
अंतत: रविवार सुबह 9:40 बजे मरीज की मौत हो गई। इस बारे में जब पैरा मेडिकल स्टाफ ने डाक्टर को जानकारी दी, तब एक डाक्टर मौके पर आया और मरीज को मृत घोषित कर परिवार वालों को ढांढस बंधाने लगा।
आरोपी डॉक्टरों पर हो कार्रवाई
प्रेम चंद के बेटे सुरेंद्र कुमार बैंक में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इस उम्मीद से आए थे कि आईजीएमसी में अच्छा इलाज मिलेगा। लेकिन यहां आकर भ्रम टूट गया। यहां पूछने वाला कोई नहीं। सभी टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद पिता को देखने कोई नहीं आया।
मेडिसन और सर्जरी के डाक्टर एक-दूसरे का केस बताकर उन्हें टरकाते रहे। समय पर इलाज न मिलने से उनके पिता की सांसें थम गईं। ऐसे लापरवाह डाक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दूसरे मरीज के साथ ऐसा न हो।
देखेंगे, क्या है मामला
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि मामला क्या है, इस बारे में अभी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही साफ तौर पर कुछ कह पाएंगे। तीमारदार उन्हें लिखित में शिकायत दें।