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डेढ़ लाख किराया देकर निजी बस से बिहार लौट गए दर्जनों मजदूर

Mon, 18 May 2020 09:53 AM IST
अरविन्द ठाकुर एसडी शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, मैहतपुर (ऊना)
एसडी शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, मैहतपुर (ऊना) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 18 May 2020 09:53 AM IST
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parvasi mazdoor pay one lakh rupee to private bus for going home to Bihar stranded in una in lockdown
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों के पलायन का सिलसिला जारी है। प्रदेश के ऊना जिले के सरहदी क्षेत्र मैहतपुर-बसदेहड़ा और रायपुर सहोड़ां से 37 मजदूरों के बिहार लौटने की सूचना है। बताया जा रहा है कि ये मजदूर अपने खर्चे पर एक निजी बस के जरिये घर लौट गए हैं। इन मजदूरों ने करीब डेढ़ लाख रुपये निजी बस को भाड़े के रूप में दिया है। इधर, लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू होते ही ऊना जिले से बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूरों ने पलायन की तैयारी कर ली है। ये लोग अब घर लौटना चाहते हैं।

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जिले के पांचों विकास खंडों से लगातार प्रशासन के पास इन प्रवासी मजदूरों के आवेदन मिल रहे हैं। अकेले ऊना विकास खंड से ही 750 प्रवासी मजदूरों ने उपायुक्त कार्यालय में आवेदन देकर घर वापस भेजने की गुहार लगाई है। जिले के अन्य चार विकास खंडों को मिलाकर चार हजार पांच सौ प्रवासी मजदूरों के आवेदन डीसी ऑफिस में रजिस्ट्रर्ड हो चुके हैं। अपने स्तर पर सैकड़ों प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों को लौट भी चुके हैं। इन मजदूरों का कहना है कि लॉकडाउन के चलते न तो उनके पास अब पहले जैसा काम बचा है, और न पर्याप्त राशन है, जो यहां बिना काम धंधा किए रह सकें। जब दिहाड़ी ही नहीं लगेगी तो यहां रहकर क्या करेंगे।

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जिप सदस्य पंकज सहोड़ ने अजौली गांव से करीब तीन सौ प्रवासी मजदूरों की मांग को उपायुक्त संदीप कुमार के समक्ष उठाते हुए इन मजदूरों के लिए उचित निर्णय लेने की मांग उठाई है। 

परमिशन मिलने के बाद बाहर जा सकते हैं लोग: डीसी
डीसी संदीप कुमार ने बताया कि अभी तक जिन प्रवासी मजदूरों ने घर वापस जाने के लिए आवेदन किए हैं, उनका डाटा फीड किया जा रहा है। इनके नाम पते संबंधित राज्य सरकारों को ऑनलाइन भेजने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने साफ किया कि बिना परमिशन कोई भी जिले से बाहर नहीं जा सकता है। चाहे बस से जाना हो या फिर पैदल।

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