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Panchvaktra Mahadev Temple: पंचमुखी मूर्ति को भस्म रमाई, जल प्रलय के नौ दिन बाद शुरू हुई पूजा-अर्चना
Tue, 18 Jul 2023 01:16 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 18 Jul 2023 01:16 PM IST
सार
सावन के सोमवार को सुबह मंदिर में पंचमुखी मूर्ति को भस्म रमाकर और सभी विधि-विधानों को पूरा करने के साथ पूजा शुरू हो गई।
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प्राचीन पंचवक्त्र महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना
- फोटो : संवाद
विस्तार
जल प्रलय के नौ दिन बाद मंडी के प्राचीन पंचवक्त्र महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। सावन के सोमवार को सुबह मंदिर में पंचमुखी मूर्ति को भस्म रमाकर और सभी विधि-विधानों को पूरा करने के साथ पूजा शुरू हो गई। सावन की विशेष पूजा सुबह सात बजे हुई। वहीं, मंदिर में पूजा के बाद भक्तों की कतारें दर्शन करने के लिए शाम तक लगी रहीं। सोमवार सुबह मंदिर के पुजारी ने पूरे विधि-विधान से भस्म रमाकर नौ दिन तक जलसमाधि में रहे भगवान पंचवक्त्र को गंगाजल से स्नान करवाया। बाद में भगवान को वस्त्र पहनाकर शृंगार किया गया।
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वहीं, बाबा भोलनाथ के साथ मां गौरा का भी शृंगार किया गया। मंदिर के पास भैरो बाबा को भी विधिवत चोेला आदि पहनाया गया। हवन कर मंदिर के वातावरण को शुद्ध किया गया। अब मंदिर श्रद्धालुओं के पूजा-पाठ और दर्शनों के लिए रोजाना खुलेगा। मंदिर के कर्मचारी हरीश शर्मा ने बताया कि मंदिर का शुद्धिकरण कर दिया गया है। इससे पहले 2019 में भी मंदिर परिसर में पानी भर गया था, तब पांच दिन तक पूजा नहीं हो पाई थी, लेकिन इस 9 जुलाई जैसा भयावह मंजर कभी नहीं देखा था।
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550 साल पुराना है पंचवक्त्र महादेव मंदिर ब्यास नदी व सुकेती खड्ड के संगम में स्थित ऐतिहासिक पंचवक्त्र महादेव मंदिर 550 साल पुराना है। इसे राजा अजबर सेन ने शिखर शैली से बनवाया था। मंदिर में भगवान शिव पांच मुख के साथ मां गौरा विराजमान है। मंदिर में विशालकाय नंदी महाराज व गणपति भगवान भी मौजूद हैं। वर्तमान समय में यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है।
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