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अनुदान पर निर्भरता घटाएं, पंचायतें संसाधनों से बढ़ाएं आय : उमाकांत
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विशेष मॉनिटर ने दिए जिप सदस्यों को दिए सुझाव
पंचायतीराज कार्यालय का दौरा कर लिया कार्यों का जायजा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पंचायतों और जिला परिषदों की आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पंचायतीराज एवं स्थानीय स्वशासन के विशेष मॉनिटर उमाकांत ने जिला परिषद सदस्यों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
उन्होंने शुक्रवार सुबह मशोबरा स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (एसआईआरडी) एवं पंचायतीराज कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण के लिए आए शिमला, लाहौल-स्पीति और कांगड़ा के जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने के संबंध में कई अहम सुझाव दिए। उमाकांत ने बताया कि स्वयं के स्रोतों से राजस्व बढ़ाकर पंचायतें अपनी आय में इजाफा कर सकती हैं। इसके लिए पंचायतों में बनी दुकानों से मिलने वाला किराया, संपत्तियों से होने वाली आय, विभिन्न शुल्क और अन्य स्थानीय स्रोतों से प्राप्त धनराशि का उपयोग किया जा सकता है। यह आय सरकारी अनुदान से अलग होती है और स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि स्वयं के स्रोतों से आय बढ़ने से पंचायतों और जिला परिषदों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध होगी और सरकारी अनुदान पर उनकी निर्भरता कम होगी। बैठक में उन्होंने जिला परिषद सदस्यों से पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। बैठक के बाद उमाकांत ने हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बरोवालिया से भी मुलाकात की। इस अवसर पर जिला पंचायत अधिकारी विनय रुढ़की भी मौजूद रहे।
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पंचायतीराज कार्यालय का दौरा कर लिया कार्यों का जायजा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पंचायतों और जिला परिषदों की आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पंचायतीराज एवं स्थानीय स्वशासन के विशेष मॉनिटर उमाकांत ने जिला परिषद सदस्यों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
उन्होंने शुक्रवार सुबह मशोबरा स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (एसआईआरडी) एवं पंचायतीराज कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण के लिए आए शिमला, लाहौल-स्पीति और कांगड़ा के जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने के संबंध में कई अहम सुझाव दिए। उमाकांत ने बताया कि स्वयं के स्रोतों से राजस्व बढ़ाकर पंचायतें अपनी आय में इजाफा कर सकती हैं। इसके लिए पंचायतों में बनी दुकानों से मिलने वाला किराया, संपत्तियों से होने वाली आय, विभिन्न शुल्क और अन्य स्थानीय स्रोतों से प्राप्त धनराशि का उपयोग किया जा सकता है। यह आय सरकारी अनुदान से अलग होती है और स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती है।
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उन्होंने कहा कि स्वयं के स्रोतों से आय बढ़ने से पंचायतों और जिला परिषदों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध होगी और सरकारी अनुदान पर उनकी निर्भरता कम होगी। बैठक में उन्होंने जिला परिषद सदस्यों से पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। बैठक के बाद उमाकांत ने हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बरोवालिया से भी मुलाकात की। इस अवसर पर जिला पंचायत अधिकारी विनय रुढ़की भी मौजूद रहे।
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