सरकार जमकर दे रही पैसा, लेकिन लेने को तैयार नहीं पंचायतें, लैप्स होंगे करोड़ों
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सूबे की ज्यादातर पंचायतें काम नहीं कर रहीं। जो कर भी रही हैं वह अपने काम की रिपोर्ट नहीं भेज रहीं। केन्द्र सरकार ने पंचायतों में विकास के लिए करोड़ों रुपए भेजे हैं। लेकिन पुराने खर्च का हिसाब न देने के कारण पंचायतों को मिलने वाला यह पैसा डूबने की कगार पर है।
सरकार हिमाचल की पंचायतों में विकास कार्यों के लिए पैसा देने को तैयार है, लेकिन पंचायतें पैसा लेने को तैयार नहीं हैं। केंद्र सरकार से 14वें वित्तायोग के तहत प्रदेश को 35 करोड़ इन्सेंटिव के तौर पर मिले हैं। बीते विकास कार्यों के खर्चों की रिपोर्ट देने पर पंचायतों को यह पैसा जारी किया जाना है, लेकिन सूबे की पंचायतों में से किसी ने भी अपनी रिपोर्ट विभाग के पास जमा नहीं कराई है।
अब पंचायतीराज विभाग ने पंचायतों को दूसरी बार रिमाइंडर भेजा है। अगर पंचायतों से विकास कार्यों के खर्चों की रिपोर्ट सरकार को नहीं मिलती है तो यह पैसा लैप्स हो सकता है। हिमाचल में 3226 पंचायतें हैं। केंद्र सरकार पंचायतों को सीधा पैसा दे रही है। 14वें वित्तायोग में पंचायतों को तीसरी किस्त जारी हो चुकी है, लेकिन कई पंचायतों में यह पैसा खर्च नहीं हो रहा है।
यह बताना होता है रिपोर्ट में
पंचायतों के विकास कार्यों के लिए जो पैसा जारी किया गया, उसे किन-किन कार्यों में खर्च किया गया? विकास कार्यों की वीडियोग्राफी भी करनी होगी। जिन पंचायतों ने पैसा खर्च कर दिया है, उन्हें सरकार से यह इन्सेंटिव दिया जाना है।
केंद्र सरकार गांवों में सड़क, रास्ते, वर्षाशालिका, श्मशानघाट, सामुदायिक भवन, स्कूलों का निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र, डंगों का निर्माण, सार्वजनिक शौचालय, कूड़ादान, खेल मैदान आदि 18 विकास कार्यों के लिए पैसा मुहैया करा रही है।
केंद्र सरकार से इन्सेंटिव के तौर पर राशि जारी हुई है। पंचायतों को पुराने कार्यों का ब्योरा सरकार को देना होगा। उसके बाद यह इन्सेंटिव का पैसा जारी होगा। पंचायतों को अब दूसरी बार रिमाइंडर भेजा है। - केवल शर्मा, संयुक्त सचिव पंचायतीराज