पंचायत चुनाव: सचिवालय जाने की बजाए प्रचार में उतरे नेता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में एक जनवरी को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने हैं। इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों दल चुनाव मैदान में कूद गए हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुनाव को लेकर मंत्री जहां अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में डट गए है वहीं भाजपा के विधायक और पार्टी नेता भी अपने उम्मीदवारों की जीत दिलाने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं।
प्रदेश में जब से आचार संहिता लागू हुई है तब से सचिवालय सूना पड़ा है। मंत्री सचिवालय में बैठने के बजाए अपने उम्मीदवारों को जीताने की कोशिश में लगे हैं। प्रतिदिन दोनों दलों के नेता उम्मीदवारों का फीडबैक ले रहे हैं। सचिवालय में जहां प्रतिदिन चार से पांच मंत्री और इतने ही सीपीएस बैठे देखे जाते थे, लेकिन अब सचिवालय में एक दो मंत्री तथा इतने ही सीपीएस बैठे देखे जा सकते हैं।
दोनों पार्टियां कर रही जीत का दावा
प्रदेश के दूसरे चरण में जहां 192 जिला परिषद सदस्यों और 1280 पंचायत समिति सदस्य चुनाव मैदान में हैं वहीं कांगड़ा जिले में 10 जनवरी को होने वाले चुनाव में 55 जिला परिषद सदस्यों, 363 पंचायत समितियों और 748 प्रधान एवं उपप्रधानों और 4682 ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए दो चरणों में मतदान होना है।
हिमाचल में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां पंचायती राज संस्थाओं में अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपा मुख्य प्रवक्ता गणेश दत्त ने कहा कि इस बार हिमाचल में जिला परिषद सदस्य और जिला पंचायत समिति में भाजपा का कब्जा होगा वहीं कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा है कि हिमाचल में कांग्रेस पार्टी को भारी समर्थन मिल रहा है। पार्टी ने प्रदेश में विकास कार्य किए हैं। इस बार हिमाचल में अधिकांश जिला परिषद और बीडीसी सदस्य कांग्रेस समर्थित चुनकर आएंगे।