आचार संहिता लागू, अब नहीं हो पाएंगे ये सारे काम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में दो महीने तक कोई भी बड़ी घोषणा नहीं हो पाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि पंचायतों के चुनाव दो महीने में ही निपट पाएंगे। राज्य सरकार ऐसी कोई भी घोषणा ऐसी नहीं कर सकेगी, जिसका प्रभाव पूरे प्रदेश की जनता पर पड़ेगा। ऐसे में जो भी आगामी दिनों घोषणाएं होंगी, वे पहले चरण में लिए गए जनजातीय क्षेत्रों से अलग शेष हिमाचल में ही की जा सकेंगी।
ऐसे में बेशक राज्य चुनाव आयोग ने केवल दो जिलों चंबा और लाहौल स्पीति में आचार संहिता लगा दी हो, मगर इसका असर पूरे प्रदेश के सरकारी कामकाज पर नजर आएगा। पंचायत चुनाव के पहले चरण की घोषणा होने के साथ ही प्रदेश के दो जिलों चंबा और लाहौल स्पीति में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लग गई है। एक महीने तक अब राज्य सरकार कोई भी प्रदेश स्तरीय घोषणा नहीं कर सकेगी।
तबादलों पर प्रतिबंध, टाइम स्केल भी लटका
दोनों जिलों में अफसरों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी प्रतिबंध लग गया है। चंबा और लाहौल स्पीति में नए विकास कार्यों पर भी रोक लग गई है। चुनाव का दूसरा चरण दिसंबर महीने में प्रस्तावित है। ऐसे में आगामी दो महीनों तक नए विकास कार्यों पर लगाम लग गई है। आचार संहिता लगने से डाक्टरों को जारी होने वाला टाइम स्केल (4-9-14) भी लटक गया है।
कैबिनेट ने टाइम स्केल को मंजूरी दे दी है। सिर्फ अधिसूचना जारी होना शेष है। इसके अलावा अनुबंध शिक्षकों के नियमितीकरण के आडे़ आ रही 31 मार्च की शर्त भी नहीं हट सकी है। इस शर्त के चलते अनुबंध शिक्षकों को पदोन्नति के लिए आठ से दस महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा कंप्यूटर शिक्षकों का मामला भी आचार संहिता के चलते फंस गया है। कंप्यूटर शिक्षक नीति बनाने की मांग पर अडे़ हुए हैं।
रोस्टर से पहले ही घोषित हो गए चुनाव
रोस्टर जारी करने से पहले ही पंचायतों के पहले चरण के चुनाव घोषित कर दिए गए हैं। जिलों में उपायुक्त अभी इसी माथापच्ची में जुटे हैं कि किस क्षेत्र में किस तरह का आरक्षण रहेगा। बुधवार को रोस्टर न तो चंबा और लाहौल-स्पीति जिलों का ही जारी किया गया और न ही प्रदेश के अन्य जिलों में ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकी है।
चंबा और लाहौल-स्पीति में इसे एक-दो दिन के भीतर जारी किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर से तैयार किए गए आरक्षण रोस्टर पर रोक के बाद हिमाचल में इसे मैनुअली तैयार करने का निर्णय लिया गया था, मगर इसे अभी तक अंतिम रूप ही नहीं दिया जा सका है। जनजातीय जिलों के जिन ब्लॉकों में ये चुनाव घोषित किए गए हैं, वहां भी आरक्षण रोस्टर पर बुधवार शाम तक स्थिति ही साफ नहीं की गई थी।
इसलिए करवाए जा रहे पहले चुनाव
यह स्थिति प्रदेश में पहली बार बनी बताई जा रही है कि बिना आरक्षण रोस्टर को अधिसूचित किए ही इन क्षेत्रों में चुनाव घोषित किए गए हैं। संबंधित जिलों के उपायुक्त अभी तक इसके लिए अभी वक्त ले रहे हैं। वहीं, पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा कि आरक्षण रोस्टर जिलों में उपायुक्तों को ही तय करने हैं। इसमें विभाग की अब कोई भूमिका नहीं है।
यहां इसलिए हो रहे पहले चुनाव
जनजातीय क्षेत्रों के तीन विकास खंडों में हाईकोर्ट के आदेशों के चलते भी पहले चुनाव कराए जा रहे हैं। सूबे के अन्य क्षेत्रों के बाद जनजातीय इलाकों में चुनाव कराने के खिलाफ एक प्रार्थी हाईकोर्ट गया था। साल 1995 के बाद कुछ जनजातीय क्षेत्रों में प्रदेश के अन्य इलाकों के बाद चुनाव हो रहे थे।
बाद में चुनाव के कारण जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में इन क्षेत्रों से चयनित सदस्य हिस्सा ही नहीं ले पाते थे। दिसंबर महीने में बर्फबारी की आशंका के मद्देनजर भी राज्य चुनाव आयोग ने इन इलाकों में नवंबर में चुनाव कराने का फैसला लिया है।