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Shimla News: कब्जे के बावजूद जमीन के मालिक नहीं बन पाएंगे राजधानी में हजारों परिवार

Tue, 16 Jan 2024 08:02 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jan 2024 08:02 PM IST
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ownership of land in shimla
1974 से पहले से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को मिलना है जमीन का मालिकाना हक
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राजधानी में तीन हजार परिवारों को थी राहत की उम्मीद, प्रमाणपत्र की शर्त पड़ रही भारी, सिर्फ आए 7 आवेदन
अमर उजाला ब्यूराे
शिमला। राजधानी में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले तीन हजार से ज्यादा गरीब परिवारों का अपने कब्जे वाली जमीन पर मालिकाना हक पाने का सपना टूट सकता है। सरकार से इन्हें जमीन का मालिकाना हक पाने का मौका तो मिला था, लेकिन इसके लिए लगाई गई प्रमाणपत्र की शर्त ज्यादातर परिवार पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
हालत यह है कि शिमला शहर से अभी तक कुल सात परिवारों ने ही नगर निगम के पास आवेदन किया है। अब आवेदन करने के लिए सिर्फ एक हफ्ता बचा है, लेकिन लोग प्रमाणपत्र नहीं जुटा पा रहे हैं। सरकार के फैसले के अनुसार झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवारों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाना है। नगर निगम ने लोगों से इसके लिए आवेदन मांगे थे। निगम के अनुसार ऐसे गरीब परिवार जो 21 फरवरी 1974 या उससे पहले से शिमला शहर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं, वे इस जमीन के मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन परिवारों को 75 वर्ग मीटर तक जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है।
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कब्जा दिखाने के नहीं मिल रहे प्रमाणपत्र
एक्ट के अनुसार आवेदन के साथ लोगों को पुख्ता प्रमाण देना होगा कि उनका कब्जा 1974 से पहले का है। कब्जे के तौर पर कोई बिल, रसीद या राजस्व रिकॉर्ड पेश किया जा सकता है, लेकिन शहर में ज्यादातर लोगों के पास ऐसा रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। इसीलिए आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रमाणपत्र की शर्त पूरी न करने पर इन लोगों को जमीन के मालिकाना हक से वंचित रहना पड़ सकता है। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि एचपी स्लम डेवेलपर्स एक्ट के अनुसार फरवरी 1974 से पहले के बने झुग्गी-झोपड़ी वाले ही जमीन के मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक्ट के अनुसार शर्तें पूरी करने वाले लोगों को ही इसमें राहत मिलनी है।
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