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Shimla News: एचपीयू में आउटसोर्स भर्तियों के खिलाफ एसएफआई उग्र
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विवि परिसर में किया प्रदर्शन, स्थायी भर्तियां करने, छात्रावास आवंटन जल्द करने की उठाई मांग
पीएचडी में दिए गलत प्रवेश की जांच करवाने का आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में तीन सालों से विज्ञापित गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती न करने और उसकी जगह आउटसोर्स आधार पर पद भरने का एसएफआई ने कड़ा विरोध किया है।
एसएफआई ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर विवि परिसर में प्रदर्शन भी किया। इस दौरान स्थायी भर्तियां करने और रिक्त पद भरने तथा छात्रावासों की आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की। इकाई अध्यक्ष हरीश और सचिव सुरजीत की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने आउटसोर्स भर्तियों को लेकर विवि प्रशासन को घेरा। छात्र नेताओं ने कहा कि पूर्व कुलपति के कार्यकाल में आउटसोर्स की जगह विवि ने स्थायी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके लिए हजारों युवाओं ने दो-दो हजार रुपये की फीस देकर आवेदन कर रखे हैं। इकाई अध्यक्ष हरीश और सचिव सुरजीत ने विवि प्रशासन से जल्द नए सत्र को शुरू करने, छात्रों के अटके और लंबित परीक्षा परिणाम घोषित करने, पीजी विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित करने, नए हॉस्टल का निर्माण करने, पुराने छात्रावासों की मरम्मत करने की मांगों को प्रमुखता से उठाया। सचिवालय सदस्य छोटू ने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोना के कारण सत्र लेट हुआ था, आज तीन साल बीत जाने पर भी विवि नया सत्र समय से शुरू नहीं कर पा रहा है।
विवि के छात्रों के परिणाम समय से घोषित नहीं हो रहे। ईआरपी सिस्टम की खामियों को दूर करने में प्रशासन नाकाम रहा है। हरीश ठाकुर ने आरोप लगाया कि विवि में भाईभतीजावाद कर आउटसोर्स पर सैकड़ों कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। यह प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के साथ धोखा है। इनसे स्थायी रोजगार के अवसर छीने जा रहे हैं। वर्ष 2020 के बाद नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्तियों के लिए तीन बार नोटिफिकेशन निकाली लेकिन फीस वसूलने के बावजूद विवि भर्ती करने में नाकाम रहा है। उन्होंने इन अनियमितताओं की जांच के लिए कमेटी गठित करने की मांग की। चेताया कि यदि यह मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन उग्र होगा।
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पीएचडी में दिए गलत प्रवेश की जांच करवाने का आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में तीन सालों से विज्ञापित गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती न करने और उसकी जगह आउटसोर्स आधार पर पद भरने का एसएफआई ने कड़ा विरोध किया है।
एसएफआई ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर विवि परिसर में प्रदर्शन भी किया। इस दौरान स्थायी भर्तियां करने और रिक्त पद भरने तथा छात्रावासों की आवंटन प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की। इकाई अध्यक्ष हरीश और सचिव सुरजीत की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने आउटसोर्स भर्तियों को लेकर विवि प्रशासन को घेरा। छात्र नेताओं ने कहा कि पूर्व कुलपति के कार्यकाल में आउटसोर्स की जगह विवि ने स्थायी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके लिए हजारों युवाओं ने दो-दो हजार रुपये की फीस देकर आवेदन कर रखे हैं। इकाई अध्यक्ष हरीश और सचिव सुरजीत ने विवि प्रशासन से जल्द नए सत्र को शुरू करने, छात्रों के अटके और लंबित परीक्षा परिणाम घोषित करने, पीजी विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित करने, नए हॉस्टल का निर्माण करने, पुराने छात्रावासों की मरम्मत करने की मांगों को प्रमुखता से उठाया। सचिवालय सदस्य छोटू ने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोना के कारण सत्र लेट हुआ था, आज तीन साल बीत जाने पर भी विवि नया सत्र समय से शुरू नहीं कर पा रहा है।
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विवि के छात्रों के परिणाम समय से घोषित नहीं हो रहे। ईआरपी सिस्टम की खामियों को दूर करने में प्रशासन नाकाम रहा है। हरीश ठाकुर ने आरोप लगाया कि विवि में भाईभतीजावाद कर आउटसोर्स पर सैकड़ों कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। यह प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के साथ धोखा है। इनसे स्थायी रोजगार के अवसर छीने जा रहे हैं। वर्ष 2020 के बाद नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्तियों के लिए तीन बार नोटिफिकेशन निकाली लेकिन फीस वसूलने के बावजूद विवि भर्ती करने में नाकाम रहा है। उन्होंने इन अनियमितताओं की जांच के लिए कमेटी गठित करने की मांग की। चेताया कि यदि यह मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन उग्र होगा।
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