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Shimla News: 100 साल पुराने भवन को खाली करने का आदेश, तीन माह में सौंपना होगा कब्जा
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रेंट कंट्रोलर कोर्ट ने किरायेदार को परिसर खाली करने को कहा
30 दिन में 38,415 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी ब्याज सहित चुकाने का आदेश
तकनीकी रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर इमारत को जर्जर और असुरक्षित माना
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मेन बाजार कसुम्पटी में करीब 100 साल पुरानी प्रकाश बिल्डिंग में दुकान और रिहायशी परिसर को लेकर चल रहे विवाद में रेंट कंट्रोलर कोर्ट नंबर-1 की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। रेंट कंट्रोलर प्रतिभा नेगी की अदालत ने इमारत के असुरक्षित और जर्जर होने तथा मरम्मत की जरूरत को देखते हुए किरायेदार वीरेंद्र कुमार वर्मा को कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं। किरायेदार को आदेश की तारीख से तीन माह के भीतर परिसर खाली कर मकान मालिकों को सौंपना होगा। अदालत ने किरायेदार को 38,415 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी ब्याज सहित 30 दिन के भीतर अदा करने को भी कहा है।
मकान मालिक जोगिंद्र कुमार शर्मा व अन्य ने बेदखली याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि उन्होंने दिसंबर 2021 में संपत्ति खरीदी थी। करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत की धज्जी की दीवारें और लकड़ी का ढांचा जर्जर हो चुका है। परिसर मानव निवास एवं उपयोग के लिए असुरक्षित है। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि दुकान और रिहायशी हिस्सा खाली करवाए बिना इमारत की व्यापक मरम्मत संभव नहीं है। साथ ही किरायेदार पर समय पर किराया नहीं चुकाने का आरोप भी लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि इमारत का ढांचा जर्जर स्थिति में है और इसमें सुधार के लिए परिसर खाली करवाना आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बेदखली का आधार नए सिरे से निर्माण नहीं, बल्कि मूलभूत मरम्मत है। इसलिए इस आधार पर किरायेदार का री-एंट्री यानी पुन: प्रवेश का अधिकार नहीं बनता।
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30 दिन में 38,415 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी ब्याज सहित चुकाने का आदेश
तकनीकी रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर इमारत को जर्जर और असुरक्षित माना
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मेन बाजार कसुम्पटी में करीब 100 साल पुरानी प्रकाश बिल्डिंग में दुकान और रिहायशी परिसर को लेकर चल रहे विवाद में रेंट कंट्रोलर कोर्ट नंबर-1 की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। रेंट कंट्रोलर प्रतिभा नेगी की अदालत ने इमारत के असुरक्षित और जर्जर होने तथा मरम्मत की जरूरत को देखते हुए किरायेदार वीरेंद्र कुमार वर्मा को कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं। किरायेदार को आदेश की तारीख से तीन माह के भीतर परिसर खाली कर मकान मालिकों को सौंपना होगा। अदालत ने किरायेदार को 38,415 रुपये का बकाया किराया 12 फीसदी ब्याज सहित 30 दिन के भीतर अदा करने को भी कहा है।
मकान मालिक जोगिंद्र कुमार शर्मा व अन्य ने बेदखली याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि उन्होंने दिसंबर 2021 में संपत्ति खरीदी थी। करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत की धज्जी की दीवारें और लकड़ी का ढांचा जर्जर हो चुका है। परिसर मानव निवास एवं उपयोग के लिए असुरक्षित है। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि दुकान और रिहायशी हिस्सा खाली करवाए बिना इमारत की व्यापक मरम्मत संभव नहीं है। साथ ही किरायेदार पर समय पर किराया नहीं चुकाने का आरोप भी लगाया गया था।
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सुनवाई के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि इमारत का ढांचा जर्जर स्थिति में है और इसमें सुधार के लिए परिसर खाली करवाना आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बेदखली का आधार नए सिरे से निर्माण नहीं, बल्कि मूलभूत मरम्मत है। इसलिए इस आधार पर किरायेदार का री-एंट्री यानी पुन: प्रवेश का अधिकार नहीं बनता।
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