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Shimla News: फलदार पेड़ों का 3.45 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

Fri, 30 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 11:59 PM IST
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Order issued for payment of Rs 3.45 lakh as compensation for fruit-bearing trees
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत का फैसला
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जुन्गा-पटगेहर सड़क के लिए अधिग्रहित की थी जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जुन्गा-पटगेहर संपर्क मार्ग के निर्माण के दौरान अधिग्रहित भूमि के फलदार पेड़ों के उचित मुआवजे को लेकर शिमला की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (प्रथम) गौरव महाजन की अदालत ने प्रभावित किसान की याचिका स्वीकार करते हुए 3,45,251 रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही संबंधित विभाग को निर्धारित अवधि के लिए नियमानुसार ब्याज अदा करने को कहा है। उपतहसील जुन्गा के गांव कोहन निवासी राम कृष्ण की भूमि लोक निर्माण विभाग ने जुन्गा-पटगेहर लिंक रोड के निर्माण के लिए अधिग्रहित की थी। वर्ष 2015 में जारी मुख्य अवार्ड में भूमि पर खड़े फलदार पेड़ों का मूल्यांकन शामिल नहीं किया था। इसके बाद भू-अधिग्रहण समाहर्ता साउथ जोन ने 26 अप्रैल 2017 को पूरक अवार्ड पारित कर 52 पेड़ों का मूल्य र्धारित किया था।
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याचिकाकर्ता राम कृष्ण ने इस पर असंतोष जताते हुए अदालत का रुख किया। उनका तर्क था कि सक्षम प्राधिकारी ने सेब, खुमानी और नाशपाती के सात से आठ साल पुराने बगीचे की किस्मों तथा बाजार दरों को नजरअंदाज करते हुए पुराने मानदंडों के आधार पर काफी कम मुआवजा निर्धारित किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनुज बाली और बीएस भंडारी ने दलील दी कि भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 के प्रावधानों का सही ढंग से अनुपालन नहीं किया है। बागवानी विभाग की ओर से वर्ष 2017 में लागू किए नए कंपोजिट इंडेक्स के मानकों के आधार पर उचित मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए था। प्रतिवादी पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी और विभागीय अधिकारियों ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को पहले ही 2,14,417 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
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पेड़ों का मूल्यांकन जिला समाहर्ता की ओर से अनुमोदित दरों और हरबंस सिंह फॉर्मूले के अनुसार किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि भू-अधिग्रहण समाहर्ता ने पेड़ों का मूल्यांकन वर्ष 2013 की रिपोर्ट और पुराने फॉर्मूले के आधार पर किया था, जबकि बागवानी विभाग ने वर्ष 2017 में मूल्यांकन के मानदंडों में संशोधन कर दिया था। 52 फलदार पेड़ों का वास्तविक बाजार मूल्य 2,26,424 रुपये बनता था, जबकि कलेक्टर ने इसका मूल्यांकन केवल 96,182 रुपये किया था। अदालत ने 26 अप्रैल 2013 से 25 अप्रैल 2014 तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 26 अप्रैल 2014 से अंतिम भुगतान होने तक 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश दिया।
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