फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Order ineffective, books have to be bought from marked shops

Shimla News: आदेश बेअसर, चिह्नित दुकानों से खरीदना पड़ रही किताबें

Tue, 18 Feb 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Feb 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
Order ineffective, books have to be bought from marked shops
दाम से भी चिंतित हैं अभिभावक, बोले-महंगाई के दौर में आधी तनख्वाह किताबों पर हो रही है खर्च
विज्ञापन

35 सौ रुपये में मिल रही सातवीं कक्षा की किताबें

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला प्रशासन के आदेशों के बावजूद अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन की ओर से चिह्नित दुकानों से ही किताबें और वर्दियां खरीदना पड़ रही हैं। शिक्षा विभाग ने दावा किया था कि स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि अभिभावकों को चिह्नित दुकानों से ही किताबें और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर न करें। लेकिन मंगलवार को शहर में इन निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

अभिभावकों का कहना है कि आधी तनख्वाह किताबों की खरीदारी में ही खत्म हो जाती है। हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की किताबों के दाम इस साल काफी बढ़ गए हैं। सातवीं कक्षा की किताबों का एक सेट 3500 रुपये में मिल रहा है, पिछले साल यही सेट 3000 रुपये का था। अभिभावक चाहकर भी अन्य दुकानों से किताबें नहीं खरीद सकते क्योंकि स्कूलों ने कुछ दुकानों को चिह्नित कर रखा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल उन्हें खास दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं जहां कीमतें अधिक हैं।स्थानीय निवासी लालचंद ने बताया कि उनके दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं और उनकी आधी तनख्वाह सिर्फ किताबों पर खर्च हो रही है। बताया कि हर साल किताबों के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन इस बार तो स्थिति और भी खराब है। 3500 रुपये में सिर्फ एक बच्चे की किताबें मिल रही हैं।
विज्ञापन


दुकानदार प्रीति ने बताया कि इस साल सीबीएसई की किताबों के दाम स्थिर हैं। पिछले साल ही सीबीएसई की किताबों के दाम बढ़े हैं। हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की किताबों की कीमतों में प्रति पुस्तक 10 से 20 रुपये की वृद्धि हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन



हर साल बदल देते हैं किताबें
रवि ठाकुर ने बताया कि उनकी बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। कहा कि हर साल स्कूल कोई न कोई बहाना बनाकर किताबें बदल देते हैं जिससे मजबूरी में नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। पुराने छात्रों की किताबें नए बच्चों को दी जाएं तो अभिभावकों पर बोझ कम हो सकता है, लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाता। कमल वर्मा अपने बच्चे के लिए किताबें खरीदकर घर लौट रहे थे लेकिन किताबों के दाम बढ़ने से वह भी चिंतित हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग को इस पर सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। अभिभावकों की मांग है कि सरकार और शिक्षा विभाग इस मामले में हस्तक्षेप करें ताकि कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article