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विस के बाहर धरने पर बैठे तीनों निलंबित विधायक, विपक्ष ने किया वाकआउट

Fri, 23 Dec 2016 10:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा)
ब्यूरो/अमर उजाला, तपोवन (कांगड़ा) Updated Fri, 23 Dec 2016 10:36 AM IST
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Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

विधायकों को निलंबित करने के मामले में विधानसभा शीत सत्र के चौथे दिन जमकर हंगामा हुआ। सदन के भीतर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल में इस पर तीखी नोकझोंक हुई तो विपक्ष ने बाहर जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

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सदन की अवमानना पर निलंबित भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज, रणधीर शर्मा और राजीव बिंदल को हाउस में जाने से रोका गया तो ये तीनों विधानसभा गेट के सामने धरने पर बैठ गए।
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सत्र शुरू होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में विपक्ष के विधायकों ने यहां जमकर विरोध-प्रदर्शन किया और निलंबन को तानाशाहीपूर्ण और नियम के विरुद्ध करार दिया। 11:00 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद विपक्ष के विधायकों ने खडे़ होकर नारेबाजी शुरू कर दी।
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इसी बीच वीरभद्र और धूमल में तीखी नोकझोंक हो गई। शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच विपक्ष ने करीब 25 मिनट बाद ही वाकआउट कर दिया। हालांकि, 12:00 बजे के बाद सदन में नोटबंदी और अन्य मसलों पर चर्चा के लिए विपक्ष लौटा तो गतिरोध कुछ टूटता नजर आया।

सदन के भीतर नोकझोंक, बाहर लगते रहे नारे

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

प्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के चौथे दिन की शुरुआत कुछ अलग अंदाज में हुई। बैठक शुरू होने से पहले विधानसभा के गेट पर शीत सत्र की आगामी बैठकों के लिए निलंबित तीनों भाजपा विधायकों सुरेश भारद्वाज, राजीव बिंदल और रणधीर शर्मा को परिसर में आने से रोक दिया गया।

सुरक्षाकर्मियों के विरोध के बीच भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने हस्तक्षेप किया तो ही उन्हें भीतर जाने दिया गया। इस दौरान अंदर नहीं जाने देने का नोटिस विधायकों को दिखाया गया तो एक विधायक ने इसे फेंक दिया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने परिसर में नारेबाजी की।

धूमल ने वीरभद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। कहा कि यह निलंबन अन्यायपूर्ण है। कहा कि भाजपा के तीनों निलंबित विधायकों को परिसर में नहीं आने दिया गया, जबकि आम आदमी यहां आ सकता है। धूमल ने कहा कि अभी तक भाजपा विधायकों को निलंबन के नोटिस भी नहीं मिले हैं।

नेता प्रतिपक्ष धूमल के नेतृत्व में नारेबाजी, वीरभद्र पर तानाशाही का आरोप

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

ये फैसला उन्हें अखबारों से मालूम हुआ है। फिर तीनों निलंबित विधायक प्रदेश विधानसभा के गेट के सामने धरने पर बैठ गए। बाकी सदस्य सदन में चले गए। निलंबित विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि वे नियमानुसार ही बुधवार को स्पीकर की चेयर पर बैठे थे। जब पौने घंटे बाद भी कोई नहीं आया तो ही वे प्रिजाइडिंग अधिकारी होने के नाते आसन पर बैठे।

निलंबित विधायकों राजीव बिंदल और रणधीर शर्मा ने भी कहा कि उन्होंने अध्यक्ष के नजदीक जाकर अपना विरोध जताया है, जो उनका अधिकार है। बाद में वीरवार को 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही ऊना के विधायक सतपाल सत्ती और अन्य भाजपा विधायकों ने स्पीकर के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गौर करने को कहा। निलंबित सदस्यों की बहाली का मामला भी उठाया।

उधर, सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि सदन की बैठकों से निलंबित विधायक अंदर नहीं आ सकते। लगभग पांच मिनट के शोर-शराबे के बीच स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने प्रश्नकाल की घोषणा कर दी। सीएम वीरभद्र सिंह कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह के सवाल का जवाब दे रहे थे कि विपक्ष के विधायकों ने खडे़ होकर नारेबाजी शुरू कर दी। 

भाजपा विधायकों ने सदन से किया वाकआउट

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

इसी बीच विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल ने सदन में भाजपा विधायकों के निलंबन का विरोध किया। इसी दौरान सीएम वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल में तीखी नोक-झोंक भी हुई। तभी प्रश्नकाल फिर शुरू कर दिया गया। करीब 11 बजकर 25 मिनट पर भाजपा विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया।

बगैर विपक्ष के प्रश्नकाल चला और मंत्रियों ने कांग्रेस विधायकों को जवाब दिए। 12 बजे के बाद विपक्ष के कुछ सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के चैंबर में बुलाई बैठक में भी भाग लिया। इसी दौरान भाजपा के अन्य विधायक प्राइवेट मेंबर्स डे पर नोटबंदी और अन्य मुद्दों संकल्प प्रस्तावों पर चर्चा को भीतर आए।

नोटबंदी के लिए सरकारी तैयारियों पर चर्चा शुरू होने के बाद भी सदन में दोनों पक्षों में नोक-झोंक चलती रही। भोजनावकाश तक कार्यवाही में गतिरोध टूटता नजर आया। भोजनावकाश के बाद भी गैर सरकारी संकल्प प्रस्तावों पर चर्चा दोबारा शुरू हुई।

वीरभद्र बोले- नौटंकी कर रही भाजपा, ये अलोकतांत्रिक 

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि भाजपा की हिमाचल में हालत यह रही है कि ये नाटक और नौटंकी ही करती रहती है। इसे मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा की ओर से सदन परिसर में किए गए प्रदर्शन पर सीएम ने कहा कि संसदीय प्रणाली में सदन के भीतर बात की जाती है, सदन के बाहर नहीं।

भाजपा की ओर से वीरवार को किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक नहीं है। शीत सत्र से भाजपा निलंबित विधायकों के भीतर आने पर सीएम बोले - विधानसभा परिसर के गेट से शुरू हो जाता है। भाजपा विधायकों को गेट पर रोके जाने के मामले में सीएम बोले कि ये स्पीकर से ही पूछा जाए। 

आपातकाल की याद दिला रहा सरकार का व्यवहार: धूमल
नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने सदन परिसर में मीडिया से दो बार बात की। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रदर्शन के दौरान धूमल ने कहा कि सरकार जिस तरह व्यवहार कर रही है, वह आपातकाल की याद दिला रहा है। कोई भी निलंबित सदस्य कैंपस में आने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस के लोगों को भी बताया गया है कि वे भीतर नहीं जाएंगे।

इसके बावजूद उन्हें रोका गया। वाकआउट के बाद सदन के बाहर कहा कि शर्म ऐसी चीज है, जो खुद को नहीं आती, औरों में दिखती है। बोले - ऐसा लगता है कि इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। हम इसका प्रोटेस्ट करेंगे। सदन में रिकॉर्ड की भाषा तक बदली जा रही है। 

परिसर में नहीं आ सकते थे भाजपा विधायक: बुटेल

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने कहा कि जब भाजपा के तीन विधायक निलंबित कर दिए गए थे तो वे विधानसभा के परिसर में भी नहीं आ सकते थे। विधानसभा परिसर के अंदर उनका आना सही नहीं है। बुटेल ने सदन के बीच

सत्ता पक्ष और विपक्ष की बैठक भी बुलाई गई थी। इसमें कोई ठोस बात नहीं हो पाई। प्रश्नकाल के बाद दोनों पक्षों के स्पीकर के चैंबर में गए थे, उस दौरान चेयर पर डिप्टी स्पीकर जगत सिंह नेगी बैठे।

टिकट की चिंता में दबाव में काम कर रहे बुटेल: भारद्वाज
शीत सत्र से निलंबित भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि टिकट की चिंता में स्पीकर बुटेल दबाव में काम कर रहे हैं। शीत सत्र से निलंबित कांग्रेस पार्टी इमरजेंसी की याद दिला रही है। तानाशाही चलाना चाहते हैं। मैं इमरजेंसी में जेल में रहा हूं। मैंने पुलिस का रिमांड भी झेला है।

हम इस मामले को लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे। हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं। हमारे सामने अधिकारी खडे़ हैं। आपातकाल में भी ऐसे ही हुआ था। शांता कुमार और दौलतराम के साथ भी गलत व्यवहार किया था। हम इसे वैधानिक तरीके से नहीं, इसे लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे।

हमारे विधायक ही हड्डी तक तोड़ चुके कांग्रेस विधायक: बिंदल
शीत सत्र से निलंबित अन्य भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने कहा कि रूलिंग पार्टी के दबाव में ही विधानसभा अध्यक्ष नियम तोड़ रहे हैं। स्पीकर साहब ने खुद भी कहा कि उन्होंने कानून तोड़ा है। इसमें वे बदलाव भी कर सकते हैं। कांग्रेस के विधायक

हमारे एक विधायक ही हड्डी तक तोड़ चुके हैं। विधानसभा के भीतर ये अभद्र गाने गाते रहे। नाचते रहे हैं। सीएम की कुर्सी के पास जाकर धूमल साहब के तो कागज तक फाड़ दिए। हमें इन्हें नियम तोड़ने के लिए खुला छोड़ दें क्या। हमने कोई अनुशासनहीनता नहीं की।

स्पीकर को हटाने के नोटिस का कोई औचित्य नहीं: अग्निहोत्री

Opposition walkout on the 4th day of Himachal Assembly Winter Session

उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि विपक्ष के स्पीकर बीबीएल बुटेल को हटाने के लिए दिए गए नोटिस का कोई औचित्य नहीं है। विधानसभा के नियमों के अनुसार स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन का नोटिस देना होता है, जबकि शीत सत्र के मात्र 2 दिन ही बाकी हैं। विस में अपने कार्यालय में ‘अमर उजाला’ से बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विधानसभा कायदे-कानून से चलती है।

विस रूल्स के मुताबिक स्पीकर के अधिकृत करने पर ही कोई सीट पर बैठ सकता है। यहां तक कि विस उपाध्यक्ष भी स्पीकर की ओर से अधिकृत करने पर ही सदन का संचालन कर सकते हैं। ऐसा विस के रूल्स में प्रावधान है। कहा कि विस के नियम 12 के तहत विस अध्यक्ष हर सत्र की शुरूआत में एक पैनल बनाकर विधायकों को वरिष्ठता के क्रम में प्रिजाइडिंग अधिकारी नामित करते हैं। 

 

लेकिन वे स्पीकर के अधिकृत करने पर ही उनकी सीट पर बैठ सकते हैं। ऐसे में भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने सीट पर बैठकर नियमों की अवहेलना की है। विस रूल्स के 133 पन्ने पर यह साफ लिखा है। अग्निहोत्री ने कहा कि विस नियमावली के रूल्स 344 से 347 में स्पष्ट है कि विस स्पीकर का फैसला सदन में अंतिम होता है। ऐसे में स्पीकर के फैसलों पर सवाल उठाना सदन की अवमानना है।

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