पीलिया पर सदन में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
राजधानी शिमला सहित सोलन, नाहन और सिरमौर में पीलिया फैलने के मामले पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। नियम 130 के तहत विपक्ष ने विधानसभा में पीलिया पर चर्चा मांगी। इसमें विपक्ष को सत्ता पक्ष की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर पहले भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा किया, उसके बाद नारेबाजी करके सदन से बाहर चले गए।
इससे पूर्व भाजपा विधायकों ने चर्चा के दौरान सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री और शहरी विकास मंत्री से इस्तीफे की मांग की। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष का पहले से ही वाकआउट करने का प्लान था। प्रश्नकाल शुरू होते ही स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में फैले पीलिया से बड़ा कोई और मामला नहीं है। ऐसे में पहले पीलिया पर चर्चा होनी चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नियम-130 के तहत पीलिया पर चर्चा करने की बात कही। इसके बाद स्थानीय विधायक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राजधानी शिमला को पीलिया ने जकड़ रखा है लेकिन प्रदेश सरकार इस पर अंकुश लगाने में नाकाम है। अब तक 20 लोग पीलिया के कारण अपनी जान गंवा बैठे हैं। अफसर पीलिया से पीड़ित हो रहे हैं।
'सचिवालय में 80 फीसदी कर्मचारी पीलिया से पीड़ित'
शिमला में 6 ट्रीटमेंट प्लांट है, इसमें से 5 प्लांट एक ही ठेकेदार को दिए हैं। प्रदेश सरकार निचले अफसरों पर कार्रवाई कर रही है जबकि बड़े ओहदे पर बैठे अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सचिवालय में 80 फीसदी कर्मचारी पीलिया से पीड़ित हैं। अगर कोर्ट की तरफ से कोई जजमेंट आती है तो अफसर दौड़े जाते हैं जबकि विधानसभा में अगर कुछ बोला जाए तो अफसर जाने को तैयार नहीं होते। उन्होंने पीलिया को महामारी घोषित करने की मांग की।
भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने कहा कि पीलिया के मरीजों का आईजीएमसी में इलाज करने के बजाए उन्हें पीजीआई रेफर किया जा रहा है। विभाग की ओर से लिए जा रहे पानी के सैंपल फेल हुए हैं बावजूद इसके सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। सीपीएस लखनपाल ने जहां पीलिया पर सेमीनार लगाए जाने की बात कही, वहीं भाजपा विधायक सुरेश कुमार ने स्कूलों में शिविर लगाने की बात कही।
सीवर मिश्रित पानी से फैला पीलिया- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा परिसर में कहा कि पीलिया महामारी नहीं है। ये एक जल जनित रोग है। जिन लोगों ने सीवर मिश्रित पानी का सेवन किया है, वह बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पीलिया पर अंकुश लगाया गया है। पहले के मुकाबले में अब पीलिया के कम मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
2005 से फैल रहा पीलिया- कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि शिमला में पीलिया 2005 से फैल रहा है। शिमला में 6 ट्रीटमेंट प्लांट में से 5 प्लांट कसुम्पटी में है। उन्होंने कहा कि ढली, गोल्छा, न्यू शिमला, मल्याणा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की हालत खस्ता है। सीपीएस रोहित ठाकुर ने कहा कि पीलिया पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने से बीमारी का हल नहीं होगा। इसके लिए ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।
पीलिया से दो और लोगों की मौत
आईजीएमसी में पीलिया से एक और मौत हो गई है। शिमला के सुन्नी निवासी रमेश (53) ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। रमेश को दस फरवरी को अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था। शुक्रवार सुबह मेल मेडिसन यूनिट में रमेश की मौत हो गई। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश चंद ने बताया कि पीलिया से सुन्नी के रमेश की मौत हुई है।
पीलिया ग्रस्त रमेश को उपचार के लिए अस्पताल में दस फरवरी को लाया गया था। यहां पर व्यक्ति का जनरल वार्ड में उपचार चल रहा था। बाद में स्पेशल वार्ड में शिफ्ट किया गया। यहां पर डॉक्टरों की निगरानी में स्पेशल वार्ड के कमरा नंबर- 619 में उपचार चल रहा था। वीरवार रात को व्यक्ति को मेल मेडिसन यूनिट थ्री में शिफ्ट किया गया, सुबह इसकी मौत हो गई।
वहीं नालागढ़ उपमंडल के जोघों निवासी पूर्व सैनिक की पीलिया से मौत हो गई है। रोगी का चंडीगढ़ के इंडस अस्पताल में उपचार चल रहा था। जोघों निवासी रविंद्र सिंह (41) को पांच दिन पूर्व बुखार आया था। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए पंजाब के रोपड़ स्थित ईसीएचएफ मिल्ट्री अस्पताल में ले गए।
लेकिन उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे वहां से मोहाली स्थित फोर्टिज चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। वहां भी कोई फायदा नहीं हुआ तो उसे आर्मी के टाईअप चिकित्सालय इंडस में रेफर कर दिया। इंडस चिकित्सालय में रविंद्र ने वीरवार शाम को दम तोड़ दिया।
2102 करोड़ से पूरी होंगी 2015-16 की अधूरी योजनाएं
सीएम वीरभद्र सिंह ने विधानसभा में वर्ष 2015-16 का अनुपूरक बजट पेश किया। सदन में पेश हुए 2102 करोड़ के अनुपूरक बजट में 1270 करोड़ 40 लाख गैर योजना स्कीमों और 352 करोड़ 10 लाख रुपये योजना और 479 करोड़ 77 लाख केंद्रीय प्रायोजित स्कीमों के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। इस अनुदान राशि के पारित होने के बाद प्रदेश की लंबित योजनाओं को पूरा किया जा सकेगा।
अनुपूरक बजट में मुख्यमंत्री ने तीन श्रेणी की योजनाओं के लिए अनुदान मांगा है। इनमें गैर योजना व्यय के तहत करीब 527 करोड़ राज्य विद्युत बोर्ड को टैरिफ रोल बैक पर उत्पादन एवं एसजेवीएनएल को जेनरेशन टैरिफ का भुगतान करने के लिए रखा गया है। इसके अलावा राज्य सरकार 157 करोड़ विभिन्न ऋणों का ब्याज चुकाने के लिए खर्च करेगी।
इसके अलावा 125 करोड़ से सरकार कुछ ऋण भी चुकता करेगी। वहीं, पुलिस और इससे संबद्ध संगठनों के लिए करीब 60 करोड़ रुपये, करीब 47 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण के लिए बतौर मुआवजा, विभिन्न जलापूर्ति स्कीमों के लिए विद्युत प्रभार के लिए पौने 24 करोड़ का बजट रखा गया है।
प्रदेश में पीलिया से हुई 10 मौतें: कौल
स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने नियम 130 के तहत पीलिया पर चर्चा में अपने जवाब में कहा कि हिमाचल में पीलिया से 10 मौतें हुई है। इसमें 5 लोग ऐसे थे, जो पहले ही बीमारी से पीड़ित थे और वह अन्य बीमारी के साथ पीलिया की चपेट में आ गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1563 मरीजों में पीलिया की पुष्टि हुई है।
अगर इसी तरह पीलिया को लेकर हल्ला होता रहा तो शिमला में टूरिस्ट आना बंद हो जाएंगे। शिमला में 578, सिरमौर में 47 और सोलन में 25 से 30 लोग पीलिया से पीड़ित पाए गए। पीलिया मरीजों का अस्पताल में मुफ्त इलाज कराया जा रहा है। सरकारी लैब में 5,651 टेस्ट किए गए, इसमें 171 लोगों में पीलिया की पुष्टि हुई है।
एसआरएल लैब में 12,083 टेस्ट किए गए, इसमें 220 लोगों में पीलिया पाया गया। आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि शिमला के लिए अश्वनी खड्ड का पानी बंद कर दिया है। शिमला सहित अन्य जिले में पीलिया के मामले कम पाए गए हैं। पीलिया पर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की है। अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। सरकार ने ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
पीलिया के लिए सरकार और नगर निगम जिम्मेवार
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने नियम 130 के तहत चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आईपीएच और नगर निगम ने जो पानी के सैंपल लिए थे, वह सभी फेल पाए गए। शिमला शहर में 10 सैंपल लिए, इसमें एक भी सैंपल ठीक नहीं पाया गया। केंद्र से आई टीम ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि पीलिया पर अंकुश लगाने के लिए पानी में जो केमिकल का इस्तेमाल
किया गया वह भी एक्सपायरी था। उन्होंने पीलिया के लिए प्रदेश सरकार और नगर निगम को जिम्मेवार ठहराया। कहा कि नगर निगम सीवरेज सैस लेता है तो ऐसे में लोगों को साफ पानी देना नगर निगम की जिम्मेवारी भी बनती है। प्रदेश सरकार ने बड़े अफसरों के बजाए निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई की है।
मनरेगा पर सदन में तीखी बहस
प्रदेश में मनरेगा के तहत राशि आवंटित और खर्च होने को लेकर विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। एक सवाल के जवाब में पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने केंद्र सरकार पर ही राशि जारी न करने का आरोप लगा दिया। बोले, अच्छे दिन की सरकार ने हिमाचल के बेहतर काम के बाद भी जारी होने वाली राशि में कटौती कर दी।
यही नहीं, बार बार रिमाइंडर के बाद भी केंद्र सरकार रुपये जारी नहीं कर रही। यही वजह है कि प्रदेश में मनरेगा के तहत होने वाले कई काम अधूरे पड़े हैं। इस जवाब से असंतुष्ट विधायकों ने राज्य सरकार पर सही से काम न करने का आरोप लगाया। सिराज से विधायक जयराम ठाकुर ने सरकार से पूछा था कि साल 2015-16 में मनरेगा के तहत कितनी राशि खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था।
भाजपा विधायकों ने पंचायती राज मंत्री पर लगाए आरोप
पंचायती राज मंत्री ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष के लिए 746.59 करोड़ का श्रम बजट अनुमोदित किया गया। साथ ही बताया कि 31 जनवरी 2016 तक 153.27 लाख कार्य दिवस अर्जित किए गए। इस सवाल के जवाब से असंतुष्ट भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार खर्च हुए पैसे का यूटिलिटी सटिर्फिकेट जारी नहीं करती। ऐसे में केंद्र से बजट कैसे मिल सकता है।
वहीं, पंचायती राज मंत्री ने पिछले सालों के आंकड़ों को आधार बनाते हुए दावा किया कि जब प्रदेश सरकार डिमांड आधारित योजना में तय समय में निर्धारित प्रतिशत से ज्यादा राशि खर्च कर सकती है, इसके बाद भी केंद्र सरकार ने उनके हिस्से की राशि को कम कर दिया। शर्मा के इस जवाब पर भाजपा विधायकों ने असंतोष जताते हुए कहा कि कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से ही केंद्र बजट जारी नहीं कर रहा।